मिलिए केदारनाथ धाम को संवारने वाले 150 योद्धाओं से, जिनको कोरोना का खौफ तक नहीं

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लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों की ना सिर्फ मुसीबत बढ़ा दी बल्कि जान तक जोखिम में डाल दी। हजारों मील दूर बैठे ये प्रवासी श्रमिक अपने अपने घर लौटने को बेताब हैं। लेकिन इसके ठीक उलट केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों में जुटे श्रमिकों को ना तो कोई कोरोना का संकट दिखाई दे रहा है और ना ही उनको घर वापसी की कोई जल्दबाज़ी है। केदारपुरी के पुनर्निर्माण कार्यों में जुटे करीब 150 श्रमिक खुद पर बाबा का आशीर्वाद बताते हैं और योद्धा के रूप में बेखौफ होकर अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

मिलिए केदारनाथ धाम को संवारने वाले 150 योद्धाओं से, कोरोना का भी खौफ नहीं

समुद्रतल से 11657 फीट की ऊंचाई पर कड़ाके की ठंड में ये श्रमिक केदारपुरी के सौंदर्यीकरण को अंजाम देने में जुटे हैं। हालांकि परिवार वालों को इनकी चिंता सताती ज़रूर है लेकिन फोन पर ये सभी श्रमिक यही कहते नज़र आते हैं कि बाबा के धाम में किसी चिंता की कोई बात नहीं। खास बात ये है कि बाहर से लोगों की आवाजाही न होने के कारण केदारपुरी में श्रमिक खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान रहे हैं और साथ ही साथ वो अपने अपने परिवारों की आर्थिकी को भी मज़बूत कर रहे हैं।

मिलिए केदारनाथ धाम को संवारने वाले 150 योद्धाओं से, कोरोना का भी खौफ नहीं

गौरतलब है कि केदारनाथ में फरवरी आखिर से ये श्रमिक अपना डेरा डाले हुए हैं। नेपाल के अलावा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और गढ़वाल (उत्तराखंड) के कुल 150 श्रमिक केदारपुरी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत शंकराचार्य की समाधि और घाट का निर्माण, सरस्वती व मंदाकिनी नदी पर बाढ़ सुरक्षा कार्य और तीर्थ पुरोहितों के आवासों का निर्माण हो रहा है। खास बात ये है कि केदारपुरी में रात में तापमान माइनस पांच डिग्री तक पहुंच जाता है और दोपहर के वक्त भी यहां आठ डिग्री के आसपास तापमान रहता है। बावजूद इसके इन श्रमिकों के चेहरों पर जरा भी शिकन नहीं दिखाई देती और न उनमें कोरोना को लेकर ही कोई खौफ है।


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