शिक्षिका ने अपने दम पर बदली सरकारी स्कूल की किस्मत, कॉन्वेंट स्कूल के मॉडल को भी पछाड़ा

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उत्तराखंड में दुर्गम क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो शहरी क्षेत्र के सुविधा सम्पन्न स्कूल भी नहीं कर पा रहे। उत्तराखंड की इस शिक्षिका का जुनून समझिए, एक ओर जहां शहरी क्षेत्रों में बहुतायत में खुलने प्राइवेट स्कूल सरकारी विद्यालयों की बन्दी का कारण बन रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर इस शिक्षिका ने शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से प्राइवेट विद्यालय ही बन्द करा दिया। इस शिक्षिका ने सिद्ध कर दिया कि अगर दिल में सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय हो तो कुछ भी असम्भव नहीं है। रुद्रप्रयाग के इस दुर्गम इलाके में बने सरकारी स्कूल में साल 2014 में जहां छात्र संख्या केवल एक रह गई थी। आज वहां पर 20 से ज्यादा बच्चे अपनी पढ़ाई को अच्छे से अंजाम दे रहे हैं।

​रुद्रप्रयाग ज़िले के अगस्त्यमुनि ब्लाॅक मुख्यालय से 20 किमी की दूरी पर स्थित उच्छाढ़ुंगी न्याय पंचायत के अन्तर्गत ग्राम पंचायत कान्दी के राजस्व ग्राम जाबरी में एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय है। स्कूल में आप जैसे ही प्रवेश करेंगे लगेगा ही नहीं कि आप किसी सरकारी विद्यालय में दाखिल हुए हैं। सभी छात्र छात्रायें साफ सुथरे कपड़ों में नजर आएंगे। ये बच्चे न केवल अपने स्लैबस तक ही सीमित नहीं हैं। सामान्य ज्ञान एवं अंग्रेजी में भी इन बच्चों की अच्छी पकड़ है। मध्याह्न भोजन बच्चे नीचे बैठकर नहीं खाते, डायनिंग टेबिल पर इन सबको खाना परोसा जाता है। ये सब मुमकिन हुआ वहां की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अरूणा नौटियाल एवं सहायक अध्यापिका चन्दा रावत के मज़बूत इरादों और हौसले से। उन्होंने एक दुर्गम क्षेत्र के सरकारी विद्यालय को कॉन्वेन्ट स्कूल में तब्दील कर दिया। इन शिक्षिकाओं की ये कोशिश ऐसे शिक्षकों के लिए एक मिसाल है जो सुविधाओं का रोना रोकर शिक्षण में रूचि नहीं लेते हैं।

​साल 2006-07 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत ये प्राथमिक विद्यालय जाबरी खुला। खुलने के साथ ही ये विद्यालय जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की अनदेखी का शिकार बना रहा। पहले इसका संचालन प्राथमिक विद्यालय कान्दी से ही हुआ। विद्यालय भवन की स्वीकृति के बावजूद बन नहीं पाया। लिहाज़ा यहां छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट आती चली गई। 2009 में इस विद्यालय में शिक्षिका अरूणा नौटियाल का आगमन हुआ।उन्होंने इस स्कूल में प्रभारी प्रधानाध्यापिका का चार्ज सम्भाला। उसके बाद से ही उन्होंने विद्यालय के अपने भवन के लिए जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से बातचीत शुरू की। 5 साल की मेहनत के बाद आखिरकार उनके प्रयासों को सफलता मिली और खण्ड शिक्षा अधिकारी केएल रड़वाल एवं तत्कालीन विधायक शैलारानी रावत के सहयोग से 2014 में विद्यालय को अपना भवन मिल पाया। हालांकि भवन तो मिला लेकिन छात्रों को स्कूल तक लाना बड़ी चुनौती बन गया। हालात ये हो गए कि महज़ एक छात्र ही स्कूल में बचा और विद्यालय पर बन्द होने की कगार पर पहुंच गया।

अरूणा नौटियाल ने अधिकारियों से एक मौका देने मिन्नतें की। उनकी सोच को देखते हुए उन्हें अधिकारियों ने मौका तो दिया साथ ही उन्हें जल्द ही छात्रों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए। अरूणा के लिए चुनौती बड़ी होती जा रही थी। इसी बीच गांव में एक प्राइवेट स्कूल भी खुल गया। लेकिन अरुणा ने हार नहीं मानी। इसके लिए सबसे पहले अरुणा ने स्कूल को सजाने का फैसला लिया ताकि वो बच्चों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने। इसके बाद अरुणा ने गांव के घऱ-घर जाकर बच्चों के मां-बाप को समझाना शुरू किया। और उन्हें अच्छी शिक्षा देने का वादा भी किया।देखते ही देखते स्कूल का कायाकल्प हो गया। बच्चों की संख्या में इज़ाफा होने लगा। विद्यालय में सभी कक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षण कार्य होने लगा। प्रत्येक शनिवार को दोनों शिक्षिकाओं द्वारा एक घण्टे कौशल कार्य के तहत गुलदस्ते, खिलौने, पेन्टिंग सहित कई रोचक शिक्षण की सामाग्री बनाने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा।

सभी छात्र छात्राओं को ड्रेस, नेमप्लेट एवं टाई की समुचित व्यवस्था की गई है। वो भी तब जब कि उनका वेतन कई माह तक नहीं मिल पाता है। और मिलता भी है तो टुकड़ों में। इसके बाबजूद उन्हें न कोई गिला है न कोई शिकायत। वह अपना कार्य पूरी लगन एवं ईमानदारी से कर रही हैं। उनकी यह मेहनत काम आई और आज विद्यालय में छात्र संख्या 20 तक पहुंच गई है। जबकि उनके लिए चुनौती बना प्राइवेट विद्यालय बन्द हो चुका है। उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में बेहाल प्राथमिक शिक्षा की बेहतरी के लिए अरूणा की यह पहल उम्मीद तो जगाती ही है।

जाबरी की शिक्षिका अरूणा नौटियाल एवं चन्दा रावत ने बेहतरीन कार्य कर विद्यालय को एक माॅडल विद्यालय बना दिया है। उनके इस अभिनव प्रयोग को ब्लाॅक के अन्य विद्यालयों में भी अपनाया जायेगा। उनका यह प्रयास अन्य शिक्षकों को भी प्रेरित करेगा।


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