बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाकर मिसाल बने भरत राणा, नरेन्द्र मोदी के हाथों भी मिला सम्मान

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मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हों तो मुश्किलों में भी आसानियां दिखने लगती हैं। ऐसी ही मिसाल पेश की है उत्तरकाशी ज़िले के नौगांव विकास खंड के हिमरोल गांव निवासी भरत सिंह राणा ने। ये प्रगतिशील किसान महज़ 8वीं पास हैं। लेकिन इस बड़ी सोच वाले कास्तकार ने क्षेत्र के लोगों को एक नई मुहिम के साथ जोड़कर गांव की तस्वीर ही बदल डाली। भरत राणा ने गांव वालों को सामुहिक चकबंदी के लिए प्रेरित किया और खुद की बंजर पड़ी ज़मीन पर एक हेक्टेयर का चक तैयार किया। इस बंजर ज़मीन पर भरत राणा ने वो कर दिखाया जिससे वो पूरे गांव के लिये प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

अपने हाथों से उपजाऊ ज़मीन पर भरत राणा पिछले कुछ सालों से वैज्ञानिक तरीके से बागवानी, नगदी फसल उगा रहे हैं। साथ ही वो मत्स्य पालन भी करके कमाई के साधन को गांव में ही पैदा कर रहे हैं। जिसको देखने के लिए भारत के ही नहीं बल्कि इंग्लैंड, नीदरलैंड, नेपाल आदि देशों से भी ग्रुप आते रहते हैं।  राणा बताते हैं कि

” कृषि विभाग के सहयोग से तैयार पाॅली हॉउस में हम सेब, आड़ू, पूलम, खुमानी आदि फलों के अलावा टमाटर, फ्रेंचबिन, शिमला मिर्च मशरूम,के साथ सतावर अलेवेरा आदि औषधीय पौधे तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। घर पर छोटी प्रॉसेसिंग यूनिट लगाकर वह बेकार होने वाले सी ग्रेड के फलों व सब्जियों को भी उपयोग लायक बना रहे हैं। इन फलों से चटनी, अचार, जैम और जूस बनाकर बाजार में सप्लाई कर वह अच्छी रकम कमा लेते हैं। खेती के कार्य से ही हमारा सलाना टर्न ओवर करीब 8 से 10 लाख तक है।”

यही नहीं भरत राणा ने सगन्धीय पौधों के साथ साथ औषधीय हर्ब्स का भी उत्पादन करने लगे। लेमन ग्रासस्टेवियारोजमेरीसतावरएलोवेरामारजोरमतुलसी आदि से काफी मुनाफा होने लगा। इन्हीं से राणा ने कई प्रोडेक्ट्स भी मार्केट में उतारे जिनका रिस्पॉन्स शानदार मिला।

गांव की महिलाओं की बदली किस्मत

इस प्रगतिशील किसान की सोच यहीं तक सीमित नहीं है। राणा अपनी निजी कमाई से अलग महिलाओं को स्वरोजगार देने का भी काम कर रहे हैं। इस व्यवसाय में उनके साथ आस पास के गांव की करीब 400 महिलायें जुड़ी हैं। जो उन्हें सीजन में कच्चा उत्पाद लाकर बेचती हैं। महिलायें जंगल से बुरांस के फूल, चुलु का छिलका और बाजार में न बिकने वाले फल व सब्जियां उन्हें सप्लाई कर अपनी रोज़ी रोटी को और भी सुधार रही हैं।

गांव में खुले विलेज टूरिज्म के मार्ग

खेती बागवानी को बढ़ावा देने के बाद अब हिमरोल गांव के प्रगतिशील किसान भरत सिंह राणा ने अपने गांव में विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया है। उनके प्रयासों से गांव में पहली बार पर्यटक पहुंचे। भरत सिंह ने लंबी तैयारी के बाद ग्रामीण पर्यटन की शुरूआत की है, जिसके तहत गांव में बनाए गए आदर्श उद्यान में हर्बल चाय, जड़ी बूटी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, सेब के बागीचे आदि के बारे में जानकारियां दी जाती हैं जिससे उनकी इनकम भी होती है। भरत राणा का मानना है कि विलेज टूरिज़्म से ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिलने से पलायन पर रोक लग सकेगी। साथ ही क्षेत्र की ख्याति भी देश-दुनिया तक पहुंचेगी।

नरेन्द्र मोदी से मिला है सम्मान

राणा को खेती में उत्तम कार्य के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है। साल 2016 में राज्य स्थापना दिवस पर पूर्ववर्ती सरकार राज्यस्तरीय कृषि पंडित सम्मान से भी नवाज चुकी है। कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मेजरमेंट अजेंसी (आत्मा) और पंतनगर विश्वविद्यालय भी कई बार उन्हें सम्मानित कर चुका है। भरत राणा को वर्ष 2012 में कृषि विभाग का जनपद स्तरीय सम्मान, 2015 में राज्य स्तरीय उत्तराखंड नायक की सम्मान, 2016 में राज्य स्तरीय हरेला घी संक्रांति महोत्सव सम्मान और 10 सितम्बर 2013 को गुजरात कृषि समिट में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

असंभव को संभव करने पर मिले कई सम्मान इस क्षेत्र के स्वावलंबी व संघर्षशील किसान भरत सिंह राणा ने बिना किसी सरकारी मदद के ऐसा कुछ कर दिखाया जो असंभव ही नहीं नामुमकिन था। उनके इस शानदार प्रयास को हमारा सलाम।


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