उत्तराखंड का मश्हूर पनीर वाला गाँव, जहां नई बहु को सबसे पहले दी जाती है पनीर बनाने की ट्रेनिंग

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उत्तराखंड है ही ऐसी जगह जहां की हर बात निराली है, जहां का हर गांव निराला है वहां की कहानियां भी निराली है। टिहरी जिले में मसूरी से यमुनोत्री जाते वक्त उत्तरकाशी बाईपास पर एक छोटा सा गांव पड़ता है जिसका नाम है रौतों की बेली। ये गांव भी किसी दूसरे सामान्य गांव की तरह ही दिखता है, लेकिन इस गांव का पनीर पूरे उत्तराखंड में फेमस है। और यही पनीर इसको दूसरे गांव से अलग भी बनाता है।यकीन मानिए इस गांव में जितना भी पनीर एक दिन में बनता है सारा का सारा एक ही दिन में खत्म हो जाता है।खास बात ये है कि अब यहां एक नई रस्म भी ईजाद हो चुकी है।यहां पर जब कोई नई बहु आती है तो उसे सबसे पहले पनीर बनाना सिखाया जाता है। यानी नई बहु भी पनीर बनाने में महारत हासिल कर लेती है।

उत्तराखंड का पनीर वाला गांव बनने की दिलचस्प कहानी

पनीर वाला गांव बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। इस गांव के लोग कुछ साल पहले तक दूध बेचा करते थे, लेकिन दूध से उतना फायदा नहीं था, लेकिन जब से गांव में पनीर बनाने की शुरुआत हुई है तब से इस गांव की तकदीर ही बदल गई। इसी पनीर से गांव वाले तीन-चार गुना लाभ कमा रहे हैं।

गाँव के मेहरबान सिंह भंडारी बताते हैं, “पहले यहां के लोग दूध बेचकर ही थोड़ा बहुत पैसा कमाते थे।यहां से लोग देहरादून दूध बेचने जाया करते थे, लेकिन 1980 के आसपास यहां पर पनीर का काम शुरू हुआ। पनीर उत्पादन यहां के लोगों का मुख्य रोजगार बन गया है, जब से यहां से उत्तरकाशी बाई पास बना है तब से पनीर यही पर बिक जाता है। पहले मसूरी में नीचे से पनीर आता था, वहां पर किसी ने बताया कि पनीर बनाओ पहले एक-दो घरों में पनीर बनता था, अब तो घर-घर पनीर बनने लगा है।

यही नहीं इस गाँव में शादी करके जो बहू आती हैं सबसे पहले उन्हें पनीर बनाना सिखाया जाता है। मसूरी से कुछ किलोमीटर दूर है और बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में जब आने-जाने के रास्ते बेहद सीमित हुआ करते थे तो मसूरी में पनीर की खपत इसी गांव से पूरी की जाती थी पनीर अब एक ऐसा साधन बना है जिसने यहां के युवाओं को रोजगार भी दिया है और पलायन पर रोक भी लगाई है। ज़ाहिर है ये पनीर वाला गांव अपनी पहचान बना चुका है। यहां का पनीर भी शुद्ध और बिना मिलावट के तैयार किया जाता है। तभी तो इस गांव की रौनक बढ़ गई है। जहां पूरा गांव एक ही काम को अपना काम मान लें वहां ना सिर्फ तरक्की के दरवाज़े खुलते हैं बल्कि गांव के साथ साथ लोगों की भी किस्मत चमक जाती है।


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