10वीं पास एक पहाड़ी जो आज चीन पर करता है राज, जानिए देव की शून्य से शिखर तक की कहानी

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चीन में एक पहाड़ी ऐसा भी है जो कुंग फू देव नाम से फेमस है। टिहरी गढ़वाल के केमरिया सौड़ गांव के मूल निवासी देव रतुड़ी आज चीन के सिंकदर बन चुके हैं। देव रतुड़ी भारत में भले ही कम लोग जानते होंगे, लेकिन वो चीन के मशहूर हस्तियों में से एक हैं। देव को चीनी भाषा बखूबी आती है। चीनी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से मुकाम हासिल कर चुके हैं। ये सब तो उनके शौक में से एक है। असल में देव चीन में 8 रेस्टॉरेंट के मालिक हैं। जी हां, देव रतूड़ी के चीन में एक दो नहीं बल्कि 8 रेस्टॉरेंट चलते हैं वो भी छोटे-मोटे नहीं, भारतीय संस्कृित को दर्शाने वाले । सफलता के शिखर पर मौजूद देव ने यहां पहुंचने के लिए कितना संघर्ष किया है कोई नहीं जानता। चमियाला इंटर कॉलेज से 10वीं पास करने वाला एक वेटर आज चाइना में 8 रेस्टॉरेंट का मालिक है।

शून्य से शिखर तक पहुंचने की कहानी


देव रतुड़ी का पूरा नाम द्वारिका प्रसाद रतुड़ी है। 1995 में देव को अपने बड़े भाई की तरह ही नौकरी करने परदेश जाना था। देव सिर्फ नौकरी नहीं करना चाहते थे वो कुछ बड़ा करने की फिराक में थे क्योंकि उनके सपने काफी बड़े थे। 1995 में देव को दिल्ली आने का मौका मिला। दिल्ली आकर भी वो ज्यादा कुछ कर नहीं सके। उन्होंने डेयरी में काम करके घर-घर दूध पहुंचाने का काम किया। जिसके लिए उन्हें मात्र 400 रुपये सैलरी मिलती थी। दिल्ली दिल नहीं लगा तो वो मुंबई चले गए। देव के भाई एक्टर पुनीत इस्सर के ड्राइवर थे। देव खुद एक अभिनेता बनना चाहते थे। देव को मौका भी मिला लेकिन कैमरे के सामने उनकी बोलती बंद हो गई। लिहाज़ा उनका ये सपना टूट गया। देव फिर होटलों में छोटे-मोटे काम करने लगे। लेकिन देव की किस्मत का दरवाज़ा अभी खुलना बाकी था।

2005 में बदल गई ज़िन्दगी

देव की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव 2005 में आया। देव को 2005 में चीन में वेटर की नौकरी करने का मौका मिला और वो भारत छोड़ चीन के लिए रवाना हो गए। 400 रुपये तनख्वाह पाने वाले देव की किस्मत चीन जाते ही खुलने लगी और साल 2009 आते-आते देव लाखों में कमाने लग गए। साल 2010 में उन्होंने अपना खुद का रेस्रां खोलने के लिए काम शुरू किया। जेब में पैसे नहीं थे तो अपने पुराने मालिक से पैसे मांगकर उन्होंने 2013 में अपना पहला रेस्तरां- रेड फोर्ट खोला। चीन के शांग्जी प्रांत के शियान शहर में देव का ये रेस्तरां चल निकला। जिसके बाद देव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लाखों से करोड़ों तक ऐसे पहुंचे देव

देव एक के बाद एक कामयाबी की दास्तां लिखते चले गए। चीन में उन्होंने 8 रेस्टॉरेंट खेल डाले। इसके बाद देव ने अपने शौक पूरा करने की ठानी। कुंग फू, कराटे, मार्शल आर्ट के बीच देव ने चीन में योगा सेंटर भी खोला है। जहां न सिर्फ योग सिखाया जाता है, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी होता है। चीन के मीडिया इंडस्ट्री जैसे अखबार, वेबसाइट और न्यूज चैनल देव लगातार छाए रहते हैं। देव कई भारत-चीन के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक प्रोग्राम में प्रमुख अतिथि की भूमिका निभा रहे हैं।  हाल ही में देव अपने वतन अपनी ज़मी उत्तराखंड पहुंचे थे जहां उन्होंने 500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव भी रखा।

चीनी फिल्मों में देव का जलवा

देव के दिल में हमेशा से ही एक एक्टर बसता था और ये सपना चीन जाकर पूरा हुआ। देव ने सबसे पहले चीनी भाषा सीखी जिसके लिए उनहोंने बहुत ही कम समय लिया। सबसे पहले उन्हें एक छोटे बजट की फिल्म का ऑफर आया। जिसमें उन्हें विलेन का किरदार अदा करना था। देव विलेन के किरदार में छा गए और वहां से उनके शौक और भी बढ़ गया। आज देव स्ट्रीट रीबर्थ समेत दर्जन भर फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेर चुके है। वो फिल्मों में ज्यादातर विलेन का रोल करते हैं। देव का शौक यहीं पूरा नहीं होता। देव फिटनेस फ्रीक भी हैं लिहाज़ा योगा के साथ-साथ वो कुंग फु भी सीख रहे हैं।

देव का परिवार ही सब कुछ

देव रतुड़ी का परिवार उनके साथ ही सियान में रहता है। हालांकि देव की पत्नि भारतीय हैं। पत्नी का नाम अंजलि रतुड़ी है। और वो भी उत्तराखंड से ही ताल्लुक रखती हैं। अंजलि ऋषिकेश की रहने वाली हैं। देव के दो बच्चे हैं,  आरव और अर्णब, जिन्हें देव एक्टर बनाने का मन बना चुके हैं।

शून्य से शिखर पर पहुंचने की देव की ये कहानी वाकई दिलचस्प है। अपने दम पर देव ने वो मुकाम हासिल कर लिया जो अच्छे से अच्छा व्यक्ति नहीं कर पाता। हालांकि इसके पीछे देव की किस्मत की भी देन हैं लेकिन कहते हैं ना कि किस्मत भी उन्हीं की चमकती है जो मेहनत के लिए किसी का मुंह नहीं ताकता। देव ने हर चीज को हासिल करने के लिए कठोर संघर्ष किया है।यही वजह है कि देव आज वह चीन में सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत का भी झंडा लहरा रहे हैं। देव रतूड़ी को हमारा सलाम।    


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