बेटियों की शिक्षा के लिए किया काम, उत्तराखंड के डॉ. केवलानंद कांडपाल को मिलेगा राष्ट्रपति सम्मान

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बेटियों को दिलाया शिक्षा का हक,डॉ. केवलानंद कांडपाल, मिलेगा राष्ट्रपति सम्मान

देशभर में 47 शिक्षकों के नाम सामने आए हैं जिन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उत्तराखंड के राज्य के दो शिक्षकों का नाम इस सूची में शामिल है। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जोगला, कालसी (देहरादून) की उप प्रधानाचार्य सुधा पैन्यूली और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पुड़कूनी, कपकोट (बागेश्वर) के प्रधानाध्यापक डॉ. केवलानंद कांडपाल  को यह सम्मान मिलेगा।

राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी के प्रधानाचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल ने कुछ ऐसा किया जिसके बारे में लाखों लोग कल्पना करते हैं। उन्होंने बेटियों को शिक्षा का मार्ग दिखाया वो भी उस समाज को जो आज भी बेटियों की पढ़ाई के खिलाफ है। जिस स्कूल से बेटियां नदारत हो रही थी वहां उनका दोबारा से दाखिला होने लगा। राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार भी उन्हें बालिका शिक्षा में विशेष योगदान और शिक्षा के विकास में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए दिया जा रहा है। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2012 में वह शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. कांडपाल मूलरूप से बागेश्वर के खुनौली के रहने वाले हैं। 10 अक्तूबर 1990 को चमोली जिले के जीआईसी गोपेश्वर से वाणिज्य प्रवक्ता के रूप मे उनका करियर शुरू हुआ। इसके बाद वह पांच अगस्त 2006 को वह जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर में स्थानांतरित होकर आए। वह एटीआई नैनीताल के राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक भी हैं। राज्य की कक्षा चार से आठ तक की पुस्तकों में उनका लेखनीय योगदान रहा है। डायट में भी उन्होंने बीटीसी और डीएलएड का शत प्रतिशत परिणाम दिया। डॉ. कांडपाल के लिए उनके करियर का सबसे बड़ा चैलेज साल 2017 में आया।

वह दुर्गम राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी के प्रधानाचार्य बने। उन्होंने क्षेत्र में बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया। परिवारों को जागरूक किया। इसके लिए उन्होंने अपने विद्यालय में मां-बेटी सम्मेलन का आयोजन कराया। कहते हैं ना कि सोच से समाज बदला जाता है वही हुआ। डॉ. कांडपाल का मिशन सफलता की ओर चलने लगा था।

पहले ही साल विद्यालय छोड़ चुकी दो छात्राओं ने फिर से प्रवेश ले लिया। वह यहीं नहीं रुके अपनी मुहिम को उन्होंने बरकरार रखा और विद्यालय में मतदाता साक्षरता क्लब और जूनियर रेडक्रॉस की स्थापना की। उन्होंने विद्यालय में कई व्याख्यान आयोजित कर शिक्षा का महत्व बताया। वह रेडक्रॉस के सदस्य होने के चलते सामाजिक गतिविधियों में सदैव योगदान देते हैं। राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न शोध और उनके प्रकाशन के भी काफी चर्चे रहते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टर कांडपाल का प्रयास सराहनीय है और उनका योगदान आने वाली पीढ़ी को भी इस दिशा में कार्य करने हेतू हमेशा ही प्रेरणा देगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दोनों शिक्षकों को बधाई दी है।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सुधा पैन्यूली और डॉ. केवलानंद कांडपाल ने प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने इस सम्मान को अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी बताया।


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