ग्रीन टी Start-Up से चाय की फैक्ट्री खोलने का मिला हौसला, कमाई भी बंपर

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गुड़गांव की एक बड़ी कंपनी में काम करते हुए हिमांशु ने कुछ नया करने की ठान ली। वो बार-बार अपने गांव लौटने की धुन पर अडिग थे। लिहाज़ा कुछ नया करने की चाह उनको अपने पिथौरागढ़, उत्तराखंड खींच लाई। गांव में आकर हिमांशु ने अपना स्टार्ट अप शुरू किया, जिससे वो अपने इलाके के कई किसानों का भला कर रहे हैं।

पहाड़ में पलायन से इतर कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जो उत्तराखंड के बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाती हैं। हिमांशु जोशी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पिथौरागढ़ के हिमांशु जोशी गुड़गांव में एक बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़ कर अपने यहां चाय का नया Start-Up शुरू किया। उनका ये स्टार्ट उनकी सोच पर खरा उतरा और देखते ही देखते वो लाखों में खेलने लगे। हिमांशु जोशी का ये प्रोजक्ट चाय के शौकीनों को जंच गया और इस स्टार्ट अप ने उनके ढाई हज़ार क्लाइंट्स बना दिए। खास बात ये है उनके ये खरीददार विदेशों से उनकी चाय मंगवाते हैं। छह महीने के अंदर ही हिमांशु ने अपने इस स्टार्ट अप से खूब सुर्खियां बटोरीं।

कैसे की Start-Up की Planning

हिमांशु जोशी जाजरदेवल गांव के रहने वाले हैं।हिमांशु को पहाड़ से लगाव उन्हें गांव खींच लाया। हिमांशु गांव लौटे ग्रीन टी लांच कर इसे मार्केट में उतार दिया। इस चाय में राम तुलसी, श्यामा तुलसी, वन तुलसी, लेमन ग्रास और स्टीविया की खूबियां मौजूद हैं। ग्रीन टी के अलावा क्लासिकल हर्बल टी, फ्रूट हर्ब्स टी और ऑर्थोडॉक्स ब्लैक टी भी मार्केट में धीरे धीरे लॉन्च कर रहे हैं। हिमांशु ने अपने स्टार्ट अप से ना सिर्फ अपनी बल्कि गांव के कई किसानों की तकदीर संवार दी है।

चाय की फैक्ट्री लगाने की योजना

तैयार करने के लिए किसानों से संपर्क किया। उन्हें तुलसी उत्पादन के लिए प्रेरित किया। हिमांशु ने किसानों से 20 क्विंटल तुलसी की पत्तियां खरीदीं, साथ ही 20 क्विंटल बुरांश का आर्डर भी दिया। वो किसानों को जैविक खेती के बारे में जानकारी देते हैं। अल्मोड़ा के पहाड़पानी, जागेश्वर, धौलादेवी, दन्यां में भी उन्होंने किसानों को तुलसी, लेमनग्रास, अदरक की खेती करने को प्रोत्साहित किया है। क्षेत्र के 250 किसान उनके स्टार्ट अप से जुड़ चुके हैं। 12 युवाओं को चाय की बिक्री से रोजगार भी मिला है। हिमांशु अब औद्योगिक क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से चाय की फैक्ट्री लगाने वाले हैं, इस संबंध में उनकी उद्योग विभाग से बातचीत चल रही है। वो भविष्य में उत्तराखंड में चाय की चेन शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं।


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