पलायन पर जीत हासिल करने के लिए भाइयों ने बनाया प्लान, होमस्टे से बदली किस्मत

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उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। यहां देवताओं का वास होता है, तभी यह इतनी खूबसूरत भी है, जिसे निहारने के लिए विश्वभर से लोग सैलानी के रूप में देवभूमि पहुंचते हैं। लेकिन ये राज्य पलायन की मार से जूझ रहा है। देश बढ़ रहा है लेकिन देवभूमि खाली हो रहा है। रोजगार और सुविधाओं के लिए पहाड़ के लोगों ने शहर का रुख कर दिया। विडंबना यह कि शहर में रहने वाले भी पलायन का रोना रोते हैं। पलायन आयोग के अनुसार उत्तराखंड में 2011 की जनगणना के बाद से अब तक 734 गांव पूरी तरह खाली हो गए हैं, वहीं 565 ऐसे गांव हैं जिनकी जनसंख्या 50 प्रतिशत से कम हो गई है। ये आंकड़े सच में डराते हैं लेकिन न्यू उत्तराखंड इससे मुकाबला करने के लिए मैदान पर उतर आया है। राज्य को एक बार फिर अपने लोगों से भरने व सभी सुविधाएं लाने के लिए कई युवाओं ने अपना स्टार्टअप शुरू किया है। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा में होम स्टे का स्टार्टअप है। जहां सैलानी रुख सकते हैं और घर के जैसा आनन्द ले सकते हैं।

इसी स्टार्टअप को उत्तराखंड के दो भैयों ने पलायन से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। उन्होंने रुद्रप्रयाग जिले के ऊकीमठ में पैतृक घर को होम स्टे में बदल दिया है, जिसे पूर्ण रूप से पारंपरिक वास्तु से बनाया गया, जहां सैलानी रुक सकें। डॉ कैलाश पुष्पबाण के पास अच्छी नौकरी थी। वह वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर एनवायरमेंटलिस्ट की नौकरी में थे। लेकिन उन्होंने शहर की लाइफ को बाय-बाय बोलकर पहाड़ का रुख किया। उनका लक्ष्य पहाड़ों की संस्कृति, सभ्यता और खान-पान का प्रचार पूरे विश्व में करना है। हमने 2007 में होम स्टे का काम शुरू किया है। वो भी उसी घर में जो 7 दशक पुराना है। देश-विदेश से पर्यटक आते हैं जो काफी प्रशंसा करते हैं। उन्हें घर जैसा माहौल देने के लिए गाँव की सभ्यता और संस्कृति के साथ जो हमारे गाँव में जैविक खेती होती है, उसके बारे में जानकारी देते हैं।उन्हें जंगल वॉक, विलेज वॉक, बर्ड वॉच के लिए ले जाते हैं, साथ ही ट्रैकिंग भी करवाते हैं।

विदेश से आए सैलानी पहाड़ की वादियों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करते हैं। वह स्थानीय लोगों से इतिहास के बारे में जानते हैं और इसे स्वर्ग कहते हैं। डॉ कैलाश पुष्पबाण कहते हैं कि उन्हें हम कोदो की रोटी, झंगोरे की खीर हम उन्हें परोसते हैं, जिसका स्वाद उन्हें हमेशा के लिए उत्तराखंड से जोड़ देता है। हमारी कोशिश है कि युवाओं को इस कार्य में भागेदारी पेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। पौड़ी में कई सारे गाँव खाली हो गए हैं, वहां के बारे में भी हमने सोचा है कि उनकी मरम्मत कर उन्हें होम स्टे बना दें। इसकी सबसे खास बात ये है कि आप सीमित संसाधनों में लोगों को ठहरा सकते हैं, लोग यहां आना भी चाहते हैं। होम स्टे के स्टार्टअप से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।

सरकार ने पलायन को रोकने एंव पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना नियमावली 2018 लागू की गई। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण/पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन जनित स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा पलायन को रोकना है। अगर ये मुहिम रंग लाई तो उत्तराखंड पलायन की बीमारी जड़ से खत्म कर लेगा।


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