लॉकडाउन में फंसे नैनीताल के टीचर का कारनामा, स्कूल में रहकर दीवारों पर उकेरे ज्ञानचित्र

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दिक्कतों का रोना तो हर कोई रोता है, लेकिन सिकंदर वही कहलाता है जो मु्श्किलों में भी अपना रास्ता खोज लेता है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से लोग घरों में डरे-सहमे हैं, घरों में बंद रहने को मजबूर हैं। सरकार ने सुरक्षा के लिहाज़ से हर संस्थान को बंद कर दिया है फिर चाहें सरकारी दफ्तर हों, स्कूल हो या फिर कॉलेज। लॉक डाउन की इसी स्थिति में फंसकर नैनीताल के एक टीचर ने नई इबारत लिख दी। इस शिक्षक ने लॉकडाउन के वक्त घर के बजाय स्कूल में डेरा डालकर दीवारों को नॉलेज बैंक में तब्दील कर दिया। जी हां, इस सरकारी स्कूल की सूनसान दीवारें अब ज्ञानभंडार से बोल उठीं हैं। इस कलाकार टीचर ने स्कूल की सादी दीवारों को पेंट-ब्रश से रंगकर देश दुनिया के सामान्य ज्ञान की किताबों में तब्दील कर दिया।शिक्षक पुष्पेंद्र सिंह बिष्ट ने लगातार आठ दिन की मेहनत के बाद स्कूल की इन दीवारों का कायाकल्प कर दिया।

जुनूनी है ये उत्तराखंडी कलाकार शिक्षक

ये हुनरमंद शिक्षक महोदय उत्तराखंड के चमोली जिले के दोगड़ी कांडे गांव के रहने वाले हैं। फिलहाल शिक्षक पुष्पेंद्र बिष्ट नैनीताल जिले की राजकीय इंटर कॉलेज, ओखलकांडा में पढ़ाते हैं। पुष्पेन्द्र वैसे तो अंग्रेजी विषय के टीचर हैं लेकिन कला से उनका नाता बेहद पुराना है। इंटरमीडिएट में पुष्पेन्द्र के पास कला विषय था जिसमें उनकी बेहद रुचि थी। लेकिन वो अपने इस पैशन को आगे नहीं बढ़ा सके। 2006 में ओखलकांडा में पुष्पेन्द्र की शिक्षक के तौर पर पहली नियुक्ति हुई। ये सरकारी विद्यालय दुर्गम की श्रेणी में आता है। पुष्पेन्द्र के दिल में शुरू से ही इस स्कूल को लेकर कुछ क्रिएटिव करने की चाहत थी। लिहाज़ा लॉकडाउन की स्थिति में जब सभी लोग अपने घरों में रहकर हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे थे तब पुष्पेंद्र अपने विद्यालय की दीवारों पर पेंटिंग से बच्चों के लिए एक नए ज्ञान संसार की रचना कर डाली। विद्यालय की दीवारों पर उन्होंने उत्तराखंड, भारत और विश्व के मानचित्र को उभारा है। शिक्षक पुष्पेंद्र बिष्ट कहते हैं कि

”बच्चे कुछ बेहतर सीख सकें, उनका नॉलेज अपडेट हो इस सोच के साथ मैंने स्कूल की दीवारों पर पेंटिग बनाने का फैसला लिया। लॉकडाउन के चलते मैं अपने घर नहीं जा सका लिहाज़ा मैंने दौरान स्कूल की दीवारें पेंट करने का ध्येय बना लिया। जब स्थिति सामान्य हो जाएगी और इसके बाद जब बच्चे स्कूल लौटेंगे तो मेरे स्टूडेंट्स को ये मेरी तरफ से सरप्राइज होगा।” 

पुष्पेन्द्र ने स्कूल की दीवारों पर देश-प्रदेश और दुनिया के भौगोलिक मानचित्र के साथ संसार के द्वीप, महाद्वीप, महासागर, दुनिया के सबसे छोटे-बड़े देश, संस्कृत प्रतिज्ञा आदि को उकेरा है। यही नहीं उन्होंने विश्व के महाद्वीपों और भारत के राज्यों को अलग-अलग कलर से दर्शाया है। राष्ट्रीय धरोहर को दर्शाकर भारतीय परिदृश्य को दिखाया है।ताकि बच्चे आते-जाते खेलते-कूदते इन तस्वीरों को देखते रहें और अपना ज्ञान खेल-खेल में ही बढ़ाते भी रहें।

वैसे तो शिक्षक पुष्पेंद्र बिष्ट स्कूल के पास ही एक किराए के कमरे में रहते हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते वो अपने घर नहीं जा सके। लिहाज़ा इतने लंबे वक्त वो करते भी तो क्या करते। लिहाज़ा उन्होंने अपने पुराने पैशन यानी कला पर हाथ साफ करने का इरादा बनाया और स्कूल की दीवारों को बच्चों की पढ़ाई की किताबों में तब्दील करने का हौसला जुटा लिया।लिहाज़ा हाथों में ब्रेश थाम वो पेंटिंग करने में जुट गए।

वाकई अगर पुष्पेन्द्र बिष्ट जी जैसे गुरुजन पूरे उत्तराखंड के स्कूलों में हों तो सभी स्कूलों की कायापलट हो सकती है। शिक्षक पुष्पेन्द्र से उम्मीद है कि वो भविष्य में भी ऐसे ही सुन्दर कार्यों से अपने विद्यालय का नाम रोशन करते रहेंगे।शिक्षक पुष्पेन्द्र के इस सराहनीय काम को हमारा सलाम….


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