उत्तराखंड के नैनीताल में बनती है बेस्ट ऑर्गेनिक हर्बल टी, सुवर्णा हल्दी चाय का नया स्टार्ट-अप

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भारत में आपको मुश्किल से ही ऐसा घर मिलेगा जहां चाय ना बनती हो। चाय तो हिन्दुस्तानियों की रगों में बहती है। करीब 65 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनके दिन की शुरुआत चाय के बिना होती ही नहीं है। कुछ लोग तो चाय के इतने शौकीन होते हैं कि अगर एक भी दिन उनको चाय न मिले तो सिर चकराने के साथ ही किसी भी काम में मन नहीं लगता है। लेकिन मुश्किल एक है दूघ- चीनी- चायपत्ती की चाय पीने वाले लोगों की संख्या बहुतायत में है। हालांकि हर्बल टी / Organic Herbal Tea का भी प्रचलन तेज़ी से बढ़ा है लेकिन अगर नॉर्मल चाय से तुलना करें तो हर्बल चाय का सेवन करने वाले बहुत ही कम लोग मिलेंगे। लेकिन घर में बनने वाली चाय जिसे CTC Tea कहा जाता है वो कैफीन से लैस होती है जिसका नुकसान भी  काफी होता है। लेकिन अब लोग धीरे-धीरे ही सही हर्बल टी के फायदों को समझ चुके हैं लिहाज़ा लोग इस तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। 

उत्तराखंड में बढ़ता ऑर्गेनिक हर्बल चाय का ट्रेंड / Organic Herbal Tea Trend in Uttarakhand 

क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में भले ही लोग देसी और कड़क चाय के शौकीन हों लेकिन यहां की बनी हर्बल चाय की दुनिया दीवानी है। दरअसल उत्तराखंड के हिमालयी रेंज (Himalayan Range of Uttarakhand) में उगने वाली जड़ी बूटियों, फूल, फलों व पत्तियों की चाय का देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया दीवानी है। नैनीताल के तल्ला गेठिया गांव (Nainital) में कर्तव्य कर्मा संस्था (Kartavya Karma Ngo) फिलहाल इसी तरह के Herbal Tea blends यानी हर्बल चाय बनाने का काम महिलाएं कर रही हैं। नैनीताल के गांव में बनने वाली ये जैविक हर्बल चाय ( Organic Herbal Tea) उत्तराखंड की बड़ी बड़ी चाय कंपनियों को भी फेल कर रही है। यहां बनी हर्बल टी के लोग दीवाने बन चुके हैं। खास बात ये है कि Pahari Haat Brand से बिकने वाली ये चाय पूरी तरह से Organic, Herbal और Healthy है। यानी नैनीताल ज़िले में Organic Herbal Tea की manufacturing unit से आपको कई तरह की Himalayan Range की Organic Healthy Herbal Tea मिल जाएंगी। 

Best Organic Herbal Tea manufacturer in Uttarakhand (Nainital, Kumaon region

उत्तराखंड के कुमाउं मंडल में नैनीताल में बनती है शानदार हर्बल टी / Best Organic Herbal Tea manufacturer in Uttarakhand (Nainital, Kumaon region)

नैनीताल के छोटे से गांव तल्ला गेठिया गांव में बनने वाले Organic Herbal Tea Blends Uttarakhand में तो मशहूर हो ही रहे हैं साथ ही देश भर में भी इनकी डिमांड बढ़ती जा रही है। इस हर्बल टी यानी हर्बल चाय की खास बात ये है कि चाय में इस्तेमाल होने वाली (Organic Herbs, Flowers, Leaves, Roots) जड़ी- बूटियां, फल, फूल, पत्ती व जड़ सीधे किसानों से खरीदी जाती है। इसके बाद इसको (Dry, Grading & Sorting) सुखाना, साफ सफाई करना, कूड़ा डंठल छाटना और उसके बाद इसकी (Herbal Blending) ब्लेंडिग करना ये सारा काम (Kartavya Karma Ngo) कर्तव्य कर्मा संस्था से जुड़ी महिलाएं करती हैं। हर्ब्स को सुखाने भर से ही हर्बल टी में इसका इस्तेमाल कर लिया जाए ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यहां हर किसी महिला को पता है कि कौन सी हर्ब्स को सीधे धूप में सुखाना है या फिर कौन सी हर्ब्स को धूप की छांव में सुखाया जाता है। यही नहीं कुछ हर्ब्स ऐसी भी होती हैं जिनमें कीड़ा पड़ने का चांस ज्यादा होता है। मसलन, कैमोमाइल, मोरिंगा, मिंट (Organic Chamomile, Mint, Moringa) जैसे Herbal flowers और Leaves में दो से तीन महीने में ही कीड़ा पड़ जाता है लिहाज़ा इन Herbs को छांव में सुखाने के बाद स्टेरेलाइज़ेशन (Sterilization Process) किया जाता है। खास बात ये है कि ये प्रोसेस भी without Chemical वाली विघि यानी Steam Process (भाप विधि) द्वारा किया जाता है। हालांकि ये विधि काफी महंगी होती है लेकिन फिर भी हर्ब्स की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ को बनाए रखने के लिए इस विधि का उपयोग करना ज़रूरी होता है। पहाड़ों में ट्रांसपोर्टेशन बेहद पेचीदा और मंहगा है लिहाज़ा इन सारी बाधाओं को पार करते करते उत्पाद की कीमत काफी बढ़ जाती है लेकिन अगर आपको गुणवत्ता से समझौता नहीं करना है और साफ सुथरी और स्वास्थ्यवर्धक हर्बल टी चाहिए तो आपको अपनी जेब तो ढीली करनी पड़ेगी। Uttarakhand में Organic and Himalayan range की Herbal Tea के साथ क्या किया जाता है ये हर कोई जानता है। ना सुखाने की विधि का अनुमान, ना स्टेरेलाइजेशन प्रोसेस और ना ही उसको पैक करनी की उचित विधि का ज्ञान होना।  हर्बल टी की पैंकिग को ही लीजिए इन चाय को पैक करने के लिए पहले हर्बल टी के मैटीरियल को एल्यूमीनियम फॉयल ( Aluminium Foil Polly) में पैक किया जाता है इसके बाद इसमें (Oxygen observer Tablet) ऑक्सीजन ऑब्ज़र्वर टैबलेट डाली जाती है जो एडिबिल नहीं होती है लेकिन इसका उपयोग हर्ब्स को मॉइश्चर यानी नमी से दूर रखने के लिए किया जाता है। इसके बाद इसको कार्ड बोर्ड के (Organic Herbal Tea in Airtight Cardboard box) एयर टाइट बॉक्स में रखकर पैक किया जाता है। यही नहीं इस हर्बल चाय का न्यूट्रीश्नल टेस्ट (Nutritional Test of Organic Herbal Tea) भी किया जाता है ताकि इसमें हर तत्व यानी इग्रेडिएंट की वैल्यू का पता लगाया जा सके कि इसमें प्रोटीन, फैट, शुगर या फिर कार्बोहाइड्रेट की कितनी मात्रा है। इतना सब कुछ करने के बाद ही हर्बल टी को मार्केट में लाया जाता है। महिलाओं द्वारा बनाए जाने वाले ये टी ब्लेंड्स (Organic Herbal Teas in Nainital) वाकई में स्वास्थय के लिए काफी लाभदायक हैं। 

वैसे तो हर्बल टी पूरे उत्तराखंड में अलग अलग जगहों पर बनाई जा रही है लेकिन नैनीताल में बनने वाली हर्बल टी काफी रिसर्च के बाद ही लॉन्च की जाती है। इसके हरेक पहलू पर बारीकी से काम किया जाता है, यही नही Tea experts से पूरी तरह से राय लेने के बाद ही authentic Original Organic Herbal Tea को लॉन्च किया जाता हैृ ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो और (Top Class and Healthy Organic Herbal Tea Blend) एक सही और स्वास्थ्यवर्धक चाय ही पहुंचे। 

उत्तरांखड की नंबर वन ऑर्गेनिक हर्बल चाय / Best Himalayan Organic Herbal Tea in Uttarakhand

Nainital, Uttarakhand  में बनने वाली (Organic Herbal Tea category) ऑर्गेनिक हर्बल चाय की कैटेगरी बिल्कुल अलग है। यहां बनने वाली चाय की पहली प्राथमिकता यही होती है कि वो यहीं के उत्पादों से तैयार हो। मसलम (Himalayan Organic Nettle Tea) हिमालयन नेटल टी, नेटल दरअसल बिच्छू घास होती है जो काफी कंटीली होती है। हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली ये घास ऐसी घास है जिसका पत्ता, तना और जड़ हर किसी का प्रयोग किया जाता है। इसके पत्तों को (Dried Nettle Tea in Uttarakhand) सुखाकर चाय तैयार की जाती है। इसके भी कई ब्लेंड्स नैनीताल में ही तैयार किए जाते हैं जैसे कुछ प्रतिशत नेटल में एक भाग (Dried Lemongrass) लेमनग्रास को मिलाकर चाय तैयार की जाती है। इसी तरह (Himalayan Organic Chamomile Tea) कैमोमाइल की चाय भी ऐसे ही तैयार होती है। कैमोमाइल भी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में काफी मात्रा में होता है। इसको भी (Organic Dried Chamomile Herbal Tea) सुखाकर इसकी हर्बल टी तैयार की जाती है। इसी तरह बुरांश (Organic Dried Rhododendron Herbal Tea) जो राज्यीय पुष्प है उसका अमूमन स्क्वॉश बनाया जाता है लेकिन नैनीताल के तल्ला गेठिया गांव में इसकी चाय बनाई जाती है। वो भी (Organic Himalayan Basil – Tulsi) हिमालयन तुलसी के साथ। इसके अलावा (Himalayan Organic Lavender Tea) लेवेन्डर टी, डेंडिलयन रूट्स टी (Himalayan Organic Dandilion Roots & Leaves Tea), मुलीन टी (Himalayan Organic Mullein Tea), रोज़मेरी (Himalayan Organic Dried Rosemary), थाइम (Himalayan Organic Dried Thyme), तुलसी (Himalayan Organic Tulsi- Basil) की चाय के ब्लेंड्स यहां बनाए जाते हैं। यहां दिल्ली, मुंबई से भी चाय बनाने के ऑर्डर आते हैं। और कई बडी कंपनियों को यहां से चाय की सप्लाई भी की जाती है। इन सभी प्रोडक्ट्स को (Pahri Haat) पहाड़ी हाट नाम से बाज़ार में उतारे गए हैं। पहाड़ी हाट (Pahri Haat Herbal Tea) यानी पहाड़ का बाज़ार जहां आपको हर वो प्रोडेक्ट जो पहाड़ का हो, उच्च क्वालिटी का हो और गुणवत्ता से भरपूर हो, ऐसे ही उत्पादों को चुन चुन कर बनाया जाता है। जिससे उत्तराखंड में बने उत्पादों को नई पहचान मिल सके।

Best Organic Chamomile Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट कैमोमाइल चाय/ Best Organic Chamomile Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड के नैनीताल में बनने वाली कैमोमाइल चाय (Organic Chamomile Tea manufacturer in Nainital) हर्बल टी होने के कारण स्‍वास्‍थ्‍य लाभों का खजाना है। Pahari Haat Organic Chamomile Tea के बेहद फायदे हैं। Himalayan Range में उगने वाले बबूना के फूल यानी Chamomile Flowers आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही उपयोगी है। स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं और पारंपरिक उपचार के रूप में कैमोमाइल टी (Chamomile Tea) का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है। इस चाय में एंटी-इन्‍फ्लामेट्री ( Chamomile Tea anti-inflammatory) और एंटी-स्पाज्मडिक (Chamomile Tea antispasmodic) गुण होते हैं। कैमोमाइल टी के फायदे त्‍वचा की रक्षा करने, तनाव को कम करने, नींद को नियंत्रित करने और मासिक धर्म में होने वाली ऐंठन (menstrual cramps) को शांत करने आदि के लिए जाने जाते हैं। यह (Immunity) प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करने में मदद करती है और पेट की सूजन से भी छुटकारा दिलाती है। अधिकांश लोगों के लिए कैमोमाइल चाय अन्‍य उपचारों के पूरक के रूप में उपयोग करने पर सुरक्षित होती है। लेकिन गंभीर बीमारियों के दौरान मुख्‍य चिकित्‍सा के स्‍थान पर इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी समस्‍या के लिए पहले अपने डॉक्‍टर से संपर्क जरूर करना चाहिए।कैमोमाइल टी सबसे स्वस्थ पेय पदार्थों में से एक है और यह हर्बल टी में काफी लोकप्रिय भी है। कैमोमाइल मूल रूप से एक जड़ी बूटी है जो फूल से प्राप्त होती है। कैमोमाइल चाय बनाने के लिए पहले फूलों को सुखाया जाता हैं और फिर इन्हें गर्म पानी में (infuse) इंफ्यूज किया जाता हैं। इसके सेवन से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। कैमोमाइल टी में कैफीन नहीं होता है और इसका फ्लेवर हल्का मीठा होता है।

Best Organic Rhododendron Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट बुरांश (बुरांस) की चाय/ Best Organic Rhododendron Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड राज्य में अत्यधिक मात्रा में पाए जाने वाले बुरांश (Rhododendron) को उत्तराखंड में “राज्य पुष्प” की उपाधि से नवाजा है।यानी रोडोडेंड्रोन (Rhododendron) अर्बोरियम लाल बुरांश का बोटेनिकल नाम है। वैसे देखा जाए तो बुरांश की कुल 1024 प्रजातियां पूरी दुनिया में पाई जाती हैं।विभिन्न प्रकार के रंगीन लाल ,गुलाबी ,सफेद तथा नीले फूलों वाला बुरांश बसंत ऋतु के आरंभ से लेकर ग्रीष्म ऋतु शुरू होने के मध्य में खिलता है। उत्तराखंड में बुरांश की 6 प्रजातियां तथा एक उपप्रजाति पाई जाती है।लाल बुरांश लगभग 1800 से 3600 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सामान्य रूप से पाया जाता है। बुरांश के फूल अनेक प्रकार की बीमारियां दूर करने में सहायक होता है। ऐसा माना जाता हैं कि हृदय रोग से पीड़ित कोई भी व्यक्ति रोज लाल बुरांश (Red Rhododendron) के फूल का सेवन करे तो उसे हृदय रोग में काफी आराम पहुँचता है।साथ ही इसमें पोली फैटी एसिड पाया जाता हैं जो शरीर में कोलोस्ट्रोल नहीं बनने देता है। इसके फूलों के रस में जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं। इसके सूखे फूल दस्त, पेचिश रोग की रोकथाम में काम आते हैं।तथा ताजी पत्तियों को पीस कर उसका लेप माथे पर लगाने से सिर दर्द व बुखार ठीक हो जाता है। यह शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है।तथा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों के दर्द की समस्या होती है।हड्डियों में होने वाले दर्द में यह बहुत ही लाभदायक होता है।रक्त की कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है।किडनी/लीवर की समस्या बुरांश का फूल बेहद लाभकारी माना जाता है।इसका सेवन कर्क रोग, चर्म रोग, सूजन व किडनी के रोग में लाभदायक माना जाता है। गाँव घरों में लाल बुरांश के फूल से चटपटी चटनी भी बनाई जाती हैं जो बेहद स्वादिष्ट होती है। आपने इसका स्क्वॉश को खूब पिया होगा लेकिन नैनीताल (Nainital) के तल्ला गेठिया गांव में इसी बुरांश के फूल को सुखाकर (Himalayan Organic Dried Rhododendron Tea) चाय बनाई जाती है। पहाड़ी हाट (Pahari Haat) ब्रांड की सबसे ज्यादा बिकने वाली चाय बुरांश (Most saleable Tea of Pahari Haat Brand is Organic Rhododendron Tea) की चाय ही है। इसको Himalayan Tulsi के साथ मिलाकर बनाई जाती है। एक हिस्सा बुरांश और दूसरा हिस्सा हिमालय की तुलसी का होता है। ये बेहद कारगर साबित होती है। Pahari Haat की Herbal Tea Manufacture करने की खास बात ये होती है कि ये बुरांश के फूल ज़मीन में गिरे हुए नहीं होते हैं। बाकायदा इनको पेड़ों से ही तोड़ा जाता है। और इस बात की भी ख्याल रखा जाता है कि एक पेड़ से 30 प्रतिशत से ज्यादा फूल ना तोड़े जाएं क्योंकि वही फूल जब ज़मीन में गिरेंगे तो वो बीज बनेंगे और उनसे बुरांश के और भी पेड़ गुलज़ार होंगे।

Best Organic Nettle Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट कंडाली (बिच्छू घास, नेटल, सिसौण) चाय/ Best Organic Nettle Tea in Uttarakhand

उत्तराखन्ड (Uttarakhand) के पहाडी़ (गढ़वाल तथा कुमांऊँ) भू भाग में एक से बढ़ कर अनोखी तथा अनमोल जडी़ बूटियां पायी जाती हैं। इन्हीं में से एक है, उत्तराखन्ड के पहाडो़ में अत्यधिक मात्रा में प्राकृतिक रूप से खुद-व-खुद उगने वाला पौधा बिच्छू घास (Organic Stinging Nettle Grass)। हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाला (Two types of Nettle grown in Himalayan Range of Uttarakhand) नेटल दो प्रकार का होता है। एक को वनस्पति जगत में गिरर्डिनिया डायवर्सिफोलिया कहते हैं जो कि 1800 से 2500 मी0 की ऊँचाई जबकि दूसरी प्रजाति को अर्टिका डायोका या पर्वीफ्लोरा कहते हैं जो कि 500 से 2200 मी0 की ऊँचाई तक पाया जाता है। इस प्रजाति को लोकल भाषा में सिसूण, सिसोंण, बिच्छू घास तथा कंडाली कहा जाता है। बिच्छू घास यानि कंडाली के पौधे में आयरन, मैग्नीज, कैल्सियम, विटामिन्स, ए, बी प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं। बिच्छू घास शरीर को  Detoxify करने (विषाक्त पदार्थ निकालना) के साथ ही Digation की दक्षता में सुधार करने, ) Immunity Level को बढ़ावा देना, परिसंचरण में वृद्धि, ऊर्जा के स्तर में सुधार, माहवारी का प्रबंधन, रजोनिवृत्ति के लक्षण कम करना, त्वचा को स्वस्थ रखना, गुर्दों और पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना, सूजन को कम करना, मांसपेशियों में वृद्धि, हार्मोनल गतिविधि को नियमित करना, शुगर की बीमारी (मधुमेह) को रोकना, रक्तचाप कम करना, बवासीर को कम करना और श्वसन प्रक्रिया में सुधार लाने में मददगार बतलाया गया है। बिच्छू घास हृदय को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में भी सक्षम पाया गया है। इसका सेवध ह्रदय के स्वास्थ्य पर बहुत ही अच्छा प्रभाव डालता है। 

बिच्छू घास के सूखे पत्तों से बनी चाय (Organic Himalayan Dried Nettle Herbal Tea) का नियमित रूप से सेवन लोअर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है, और कार्डियोवास्कुलर सिस्टम पर तनाव को दूर कर सकता है। बिच्छू घास (Organic Nettle Tea) में पाए जाने वाले फायदेमंद पोषक तत्वों की वजह से यह शरीर के लिए एक बहुत ही अच्छा डेटोक्सिफायर (Detoxifier) है और इसे विषाक्त पदार्थों को शरीर से साफ करने के साथ ही यह एक अच्छा मूत्रवर्धक भी माना जाता है। बिच्छू घास से पाचन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है, जिससे शरीर में खतरनाक विषाक्त पदार्थों के संचय को रोकने से बचाया जा सकता है। यह लसीका प्रणाली को भी उत्तेजित करता है, जो कि गुर्दे में अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। बिच्छू घास से बनी चाय (Best Organic Nettle Tea in Uttarakhand) को अक्सर उन गर्भवती महिलाओं को पीने का सुझाव दिया जाता है, जो अत्यधिक लेबर पेन से गुजर रही होती हैं और साथ हु यह बहुत अधिक ब्लीडिंग से भी रक्षा करने में मदद कर सकता है। बिच्छू घास में कई सक्रिय घटक होते हैं जो स्त्री स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। यह दर्दनाक प्रीमेंस्ट्रुअल के लक्षणों, ऐंठन और सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। इसके एस्ट्रिंजेंट गुणों के कारण मासिक धर्म के दौरान रक्त के प्रवाह को कम किया जा सकता है। जो महिलाएं रजोनिवृत्ति से गुजर रही है, यह उनके लिए भी उपयोगी होती हैं। बिच्छू घास में मौजूद विटामिन सी और लौह की उच्च मात्रा का संयोजन लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करने के लिए बहुत ही अच्छा होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाने, रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, घावों को ठीक करने और शरीर के ऊपरी हिस्से में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करने में भी मदद करता है। इसी कारण से, बिच्छू घास अक्सर थकान या एनीमिया से राहत दिलाने के लिए उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जिसे सामान्य मांसपेशियों की कमजोरी, थकावट, संज्ञानात्मक कठिनाइयों और सिरदर्द से जोड़ा जाता है।

जानकार बतलाते हैं कि बिच्छू घास से बनी चाय (Himalayan Organic Nettle Tea manufacturer in Uttarakhand) का नियमित उपयोग ऑस्ट्रेलिया में, पीढ़ियों से अस्थमा के इलाज के लिए किया जाता रहा है। मानव शरीर में बढे हुए प्रोस्टेट और प्रोस्टेट कैंसर दोनों गंभीर बीमारियां होती हैं, लेकिन बिच्छू घास का सेवन प्रोस्टेट के विकास को रोकने के एक प्रभावी इलाज बतलाया गया है। नैनीताल के गांव में पहाड़ी हाट (Pahari Haat Organic Nettle Tea) की नेटल टी यानी बिच्छू घास की चाय इन्हीं गुणों से संपन्न चाय है। Pahari Haat के द्‌वारा Uttarakhand के Nainital में manufacture होने वाली Himalayan Organic Nettle Tea Best tea है जो काफी लोगों को पसंद आती है और जो स्वास्थ्यवर्धक भी है।

Best Organic Masala Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट मसाला चाय/ Best Organic Masala Tea in Uttarakhand

Corona के काल में इस वक्त हमारी इम्यूनिटी जितनी ज़्यादा बेहतर और मज़बूत होगी उतना ही हम इस महामारी से दूर रहेंगे। इसके लिए भारतीय मसालों में काफी ताकत छुपी होती है जिनके उपयोग से हम अपनी प्रतिरोधक क्षमता को आसानी से बढ़ा सकते हैं। दरअसल, पहाड़ी हाट (Pahari Haat) की पहाड़ी मसाला चाय (Pahari Masala Chai) में पड़ने वाले 20 तरह के हर्ब्स और मसाले (20 Herbs & Spices) शरीर के लिये फ़ायदेमंद होते हैं। पहाड़ी मसाला चाय न सिर्फ़ शरीर में ऊर्जा का संचार करती है, बल्कि इससे शरीर मज़बूत भी बनता है। लौंग, इलायची, दालचीनी, काली मिर्च, हल्दी, तुलसी, तेजपत्ता, जायफल,चक्रफूल जैसे कई और हर्ब्स और मसाले मिलकर इम्यूनिटी मज़बूत बनाते हैं। इसके साथ ही शरीर का वज़न भी नियंत्रित रहता है। पहाड़ी हाट की पहाड़ी मसाला चाय में पड़ने वाले कुछ चुनिंदा मसालों की बात करें तो वो किस तरह से स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं वो भी जान लेना ज़रूरी है। मसलन हरी इलायची बेहत फायदेमंद होती है ये फ़ेफ़डों में रक्तसंचार तेज़ी से बढ़ाने में मददगार होती है। हरी इलायची की तासीर गर्म होती है जिसके चलते इससे शरीर सर्दी-ज़ुकाम से भी सुरक्षित रहता है। इसी तरह दालचीनी के भी अपने बहुत फायदे हैं। दालचीनी Digestion के लिए काफी फायदेमंद spice माना जाता है। इसके साथ ही ये शरीर को ऑक्सीडेटिव क्षति से भी सुरक्षित रखती है। आयुर्वेद में दालचीनी को कई बिमारियों से लड़ने का मारक हथियार माना गया है और इसका स्वाद और सुंगध भी लाजवाब होता है।

लौंग में हानिकारक बैक्टीरिया को ख़त्म करने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है।कई विटामिनों से लैस ये छोटी सी लौंग शरीर को स्वस्थ बनाने में मददगार साबित होती है। इसी लौंग में एंटीवायरल, जीवाणुरोधी, एंटी-फ़ंगल और एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते हैं जो चाय में डलने के बाद अपना असर शरीर को स्वस्थ्य बनाने के लिए छोड़ते हैं। चक्र फूल काफी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं साथ ही विटामिन ए और सी का बड़ा स्रोत भी होता है। चक्र फूल ब्लड शुगर को भी कंट्रोल रखता है। कालीमिर्च के गुणों से कौन वाकिफ नहीं है।शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता की बढ़ोत्तरी के लिए काली मिर्च काफी कारगर होती है। चाय में हल्दी का उपयोग पहाड़ी हाट (Pahari Haat) जैसा ब्रांड ही कर सकता है। उत्तराखंड में पाई जाने वाली जैविक हल्दी के छोटे छोटे टुकड़ों का उपयोग इस मसाला चाय में किया जाता है।हल्दी के गुण इस मसाला चाय को और भी शानदार बना देते हैं। सर्दी-ज़ुक़ाम में तुलसी की चाय सदियों से चलती चली आ रही है। तुलसी में प्रतिरोधक क्षमता काफी होती है जिससे आप छोटे मोटे रोगों से आसानी से लड़ने की ताकत हासिल कर लेते हैं। यानी सुबह सुबह पहाड़ी हाट की पहाड़ी मसाला चाय मिल जाए तो आपका दिन ताज़गी से लबरेज़ से गुज़रेगा।

Best Himalayan Organic Immunity Herbal Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट हर्बल इम्यूनिटी चाय/ Best Himalayan Organic Immunity Herbal Tea in Uttarakhand

जिस चाय में गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी, आंवला, सौंफ आदि का अद्भुत मिश्रण हो वो इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए कितनी कारगर होगी ये कहना ज़रा भी मुश्किल नहीं। नैनीताल के तल्ला गेठिया में कर्तव्य कर्मा संगठन के पहाड़ी हाट ब्रांड के बैनर तले बनने वाली हिमालयन इम्यूनि-टी (Himalayan Organic Immuni-Tea) इन्हीं तत्वों से मिलकर बनी है जो कोरोना काल में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। सबसे खास बात ये है कि हिमालयी क्षेत्र (Organic Immunity Herbal Tea from Himalayan Range of Uttarakhand) की अश्वगंधा (Ashwagandha Tea), गिलोय (Giloy Tea), हल्दी (Turmeric Tea), सौंफ (Fennel Seeds) का मिश्रण वो भी ग्रीन टी (Organic Green Tea from Uttarakhand) के साथ लाजवाब है। टी एक्सपर्ट की देखरेख में बनी ये इम्युनिटी टी (Pahari Haat Himalayan Immuni-Tea) ऐसे गुणों से परिपूर्ण है जो कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने के लिए ज़रूरी प्रतिरोधक क्षमता को ना सिर्फ मज़बूत बनाता है बल्कि उसे बढ़ाता भी है। Uttarakhand के Nainital में बनी इस Organic Herbal Tea को को कोरोना टी (CORONA FIGHTER Tea) नाम दिया है। गिलोय सर्दी, जुकाम और खांसी में फायदा करता है तो तुलसी स्वयं में गुणों से युक्त है। अश्वगंधा तो सबसे अहम हर्ब्स है जो इस चाय की ताकत को कई गुना बढ़ा देती है। अश्वगंधा इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर सर्दी-जुकाम से बचाता है। यह कैंसर सेल्स को भी बढ़ने से रोकता है। यानी उत्तराखंड के नैनीताल में बनी इस आयुर्वेदिक चाय ( Best Himalayan Ayurvedic Organic Herbal Tea manufacturer in Nainital, Uttarakhand) के कहने ही क्या।

Best High Curcumin Suvarna Turmeric Tea in Uttarakhand

उत्तराखंड की बेस्ट हाई करक्यूमिन स्वर्णा हल्दी चाय/ Best High Curcumin Suvarna Turmeric Tea in Uttarakhand

भारत में हल्दी  की इतनी महत्ता है कि उसे पूजा में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी इतनी अहमियत क्यों है इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि हल्दी को प्रकृति ने औषधीय गुणों के रूप में अपना सर्वगुण आशीर्वाद दे रखा है। यही नहीं आयुर्वेद में भी हल्दी के औषधीय गुणों और इसके इस्तेमाल से कई तरह के बीमारियों के ठीक होने के बारे में विस्तृत रुप से शोध किए जा चुके हैं। रिसर्च कहती है कि हल्दी (Turmeric) छोटे-छोटे घाव से लेकर कैंसर तक जैसी घातक बीमारी को ठीक करने के लिए वरदान साबित होने वाली बूटी है।

हल्दी (Haldi, Turmeric) बहुत हेल्थी (Healthy) होती है।आमतौर पर हल्दी यानी Turmeric औषधीय गुणों से भरपूर होती है। लेकिन अगर इसकी वैरायटी में जाएं तो इसकी विशेषताओं का पता चलता है। मसलन उत्तराखंड में एक विशेष प्रकार की और उच्च प्रजाति की (Best and Top class Suvarna or Swarna Turmeric in Uttarakhand) हल्दी होती है जिसे स्वर्णा या फिर सुवर्णा (Suvarna or Swarna Haldi) हल्दी के नाम से जाना जाता है। ये Uttarakhand के Himalayan range में High altitude पर उगने वाली हल्दी की एक प्रजाति होती है। उत्तराखंड में उगने वाली ये सुवर्णा हल्दी (High Curcumin Suvarna Turmeric in Uttarakhand) में बहुत ही हाई करक्युमिन पाया जाता है। हल्दी का ये स्पेशल कंपोनेंट कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने के काम आता है। नैनीताल (Best Turmeric Tea in Nainital, Uttarakhand) में इसी स्वर्णा/ सुवर्णा ( Suvarna Turmeric Herbal Tea) हल्दी से चाय बनाई जा रही है। कर्तव्य कर्मा की महिलाएं इस स्वर्णा हल्दी की चाय बनाती हैं जिसमें काली मिर्च, अदरक, ल़ॉन्ग, गिलोय और अश्वगंधा जैसी हर्ब्स को मिलाकर एक Tea Blend तैयार किया जाता है। पहाड़ी हाट की ये स्वर्णा हल्दी चाय (Best Suvarna Turmeric Tea from Pahari Haat) बेहद लाभकारी है।

Benefits of Suvarna Turmeric Tea

 स्वर्णा / सुवर्णा हल्दी की चाय के फायदे (Benefits of Suvarna Turmeric Tea)

  हल्दी के गुणकारी फायदे कई बीमारियों में देखने को मिलते हैं। मसलन डायबिटीज के मरीजों (High Curcumin Suvarna Turmeric Benefits in Diabetes) के लिए हल्दी बेहद लाभकारी मानी जाती है। उत्तराखंड में पाई जाने वाली हाई करक्युमिन वाली स्वर्णा हल्दी में एक खास तत्व होता है जो ब्लड शुगर (Suvarna Turmeric Blood Sugar Control) को कंट्रोल करने में भी काफी कारक माना जाता है। पहाड़ी हाट की हल्दी की चाय ( Pahari Haat Suvarna Turmeric Tea) इतनी रिसर्च के बाद बनाई गई है कि इसमें हल्दी वाले दूध जितनी ही ताकत और बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। हल्दी में करक्युमिन लेवल जितना अधिक होगा उतनी ही बीमारियों से लड़ने की ताकत ज्यादा होगी। उत्तराखंड ने नैनीताल में बनने वाली स्वर्णा हल्दी की चाय में एंटी-इन्फ्लामेट्री और एंटी-आक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में होते हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी लड़ने की ताकत रखते हैं। Suvarna Haldi Tea का सेवन दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट होने से भी बचाने में कारगर साबित होता है। आर्थराइटिस में जोड़ों में दर्द और अकडन में सुवर्णा हल्दी का जवाब नहीं।  Suvarna Haldi में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होने की वजह से यह जोड़ों के दर्द और अकडन में राहत देतr है। यही नहीं Pahari Haat की Suvarna Turmeric Tea में काली मिर्च, अदरक जैसी दूसरी और हर्ब्स का मिश्रण है जिसके इस्तेमाल से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी बढती है और आपको कई तरह की होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए ताकत मिलती है। सुवर्णा हल्दी में करक्यूमिन बड़ी मात्रा पाया जाता है जो शरीर में खराब कोलेस्ट्राल को कम करता है जिससे ह्रदय सम्बन्धी बीमारियों के होने की सम्भावन बहुत कम होती है। पहाड़ी हाट की सुवर्णा हल्दी की चाय (Best Turmeric Tea from Pahari Haat) का इस्तेमाल करने से इस सभी बीमारियों में काफी आराम मिलता है। यही नहीं पेट से सम्बंधित रोग हों जैसे डायरिया और कब्ज़ से लड़ने में भी हल्दी काफी कारगर होती है। सुवर्णा हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन इन्फ्लामेसन को कम करके इस समस्या से छुटकारा देता है। सुवर्णा / स्वर्णा हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक एंटी-आक्सीडेंट कंपोनेट होता है जो शरीर के ब्लड ग्लूकोस लेवल को भी कंट्रोल में रखता है जिससे डायबिटीज जैसी समस्या से निजात मिल सकती है। सुवर्णा हल्दी (Suvarna Haldi) में पाया जाने वाला एंटी-आक्सीडेंट फेफड़ों को भी स्वस्थ रखता है। यानी अगर आपकी सुबह पहाड़ी हाट की स्वर्णा हल्दी की चाय से शुरु होती है तो यकीन मानिए आपका संपूर्ण दिन स्वास्थ्यवर्धक तरीके से ही गुज़रेगा। 

जैसे किसी भी जडी़ बूटी से सम्बन्धित उत्पाद का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो सकता है, ठीक वैसे ही हर्बल टी का अत्यधिक सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। लेख में किसी भी अवस्था में डॉक्टर्स के परामर्श के बाद ही हर्बल टी का सेवन करना चाहिए। वही स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम रहता है।


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