इंटरनेट की आंधी – पवन पहाड़ी, उत्तराखंड के इस यूट्यूबर की कहानी और कमाई जानकर रह जाएंगे हैरान

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दादी दादी दादी मि छ्यू पवन पहाड़ी..पिथौरगढ़ बै.. ठेठ कुमाऊंनी बोली में जब ये आवाज इंटरनेट पर गूंजती है तो लाखों उत्तराखंडियों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। पवन पहाड़ी ने कुमाउंनी भाषा में अपनी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए जो हल्का-फुल्का अंदाज़ अपनाया है वो वाकई काबिले तारीफ है। पवन पहाड़ी, जो हंसे-हंसे ब्येर आपण रीत-रिवाज बतूण लाग रयीं, यानी रोचक तरीके से पहाड़ के रीति-रिवाज को बताते रहे हैं। इसके पीछे उनकी हास्यरस की शैली बेहद कारगर साबित हुई। वो इंटरनेट पर आंधी की तरह छाए हुए हैं। पिछले कुछ सालों से वो यू ट्यूब और फेसबुक पर छाए हुए हैं। उनकी एक एक परफोर्मेंस पर खूब लाइक्स व कमेंट मिलते हैं।उनके यूट्यूब चैनल में सब्सक्राइबर्स की संख्या दो लाख के आस-पास पहुंच चुकी है। इसके लिए यूट्यूब ने उन्हें सिल्वर बटन से भी नवाजा है। पवन के वीडियो देखने में तो आम से लगेंगे लेकिन ठेठ कुमाऊंनी में उनकी दिलचस्प बातें जड़ों से जुड़ाव की कहानी को भी बयां करती हैं। जो उनके फेमस होने का सबसे बड़ा कारण है।

कैसे शुरु हुआ पवन पहाड़ी का सफर

पवन मूल रूप से गांव कफलेत, पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। लेकिन अब वो हल्द्वानी के करायल जौलासाल में रहते हैं। राजकीय इंटर कॉलेज पांखू से इंटर और द्वाराहाट से पॉलिटेक्निक करने के बाद अब सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। पवन का यूट्यूब अकाउंट करीब तीन साल पुराना है। इस दौरान वो कई वीडियोज़ यूट्यब पर अपलोड कर चुके हैं। इसमें वह कुमाऊं की रीति-रिवाज, त्योहार, परंपरागत खाद्य पदार्थ के अलावा कुमाऊंनी जीवन से जुड़े तौर-तरीके, रहन-सहन, खान-पान, फसक व क्वीड़ को भी रोचक तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। ये वीडियो केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश व दुनिया में बिखरे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए भी मनोरंजन के साथ ही अपनी माटी से जुड़ने का भी मौका दे रहे हैं। पवन की रग-रग में पहाड़ समाया हुआ है। पवन पहाड़ की ऐसी परंपरागत चीजों को उठा रहे, जो अब विलुप्त होने लगे हैं। यह प्रयास नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति व बोली से अवश्य जोड़ेगा।

स्पॉट पर जाकर ही बनाते हैं वीडियो

पवन की खास बात ये है कि वो अपने वीडियो बनाने के लिए वास्तविक स्पॉट पर जाते हैं। रोपाई के समय खेत में, घास काटते हुए महिला का इंटरव्यू लेने के लिए जंगल में व मेलों में जाते हैं। जहां पर पहाड़ की संस्कृति व जीवनशैली की वास्तविक झलक मिलती है, पवन वहां वीडियो बनाने चले जाते हैं। वैसे पवन हल्द्वानी में रहते हैं लेकिन पहाड़ के किस्से कहानियों के लिए वो कहीं भी निकल पड़ते है।

नई पीढ़ी का संस्कृति से परिचय

पवन का लक्ष्य पहाड़ का फेमस कॉमेडियन बन पहाड़ी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। जिस तरह नई पीढ़ी खुद को पहाड़ी कहने में शर्म महसूस करती है। अपनी बोली को बोलने में हिचकती है। इस हिचकिचाहट को दूर करना पवन का मकसद है। पवन को इस बात की खुशी है, तमाम ऐसे लोग हैं, जो उनके वीडियो को देखकर अब कुमाऊंनी बोलने लगे हैं। कुमाऊं से बाहर के कुमांऊनी मूल के युवाओं को पवन के वीडियोज काफी पसंद आ रहे हैं।पवन के प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में जगह-जगह होने वाले लोक महोत्सवों में पवन को आमंत्रित किया जाता है। विदेशों में भी पवन अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। पवन कहते हैं कि मनोरजन के अलावा वह अपनी लोक भाषा के संरक्षण और संवर्धन की भी अपील करते हैं।

पवन की रिवर्स पलायन को लेकर अपील

पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन पर अपने हर कार्यक्रम में पवन हास्य व्यंगों से मनोरंजन करने करते हैं। उनके व्यंगों में रिवर्स पलायन की अपील भी होती है। पवन मानते हैं कि पहाड़ जैसी सुन्दरता, हवा, पानी और वातावरण लोगों को करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं मिल सकता है।पवन का कहना है कि प्रदेश की कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को राज्य भाषा का दर्जा मिलना चाहिए। जिस तरह से अन्य प्रदेशों में वहां की भाषा को लोक भाषा का प्रयोग होता है, अपने लोगों से कुमाऊंनी में बात करनी चाहिए। मंत्रियों से लेकर विधायकों को अपनी भाषा में भाषण देने के साथ भाषा को बढ़ावा मिलेगा।

ये है पवन की असली कहानी

पवन पहाड़ी जिसका वास्तविक नाम पवन पाठक है। पिथौरागढ़ के दशौली गांव के बेहद सामान्य परिवार से तालुकात रखने वाले पवन की शुरुआती कहानी भी वही है जो पहाड़ के हर लडके की होती है। परिवार की आमदनी का मुख्य स्त्रोत कृषि है। मां-बाप की गांव में कमर-तोड़ मेहनत से पवन को स्कूल फिर कालेज पढाना और फिर पवन का गांव से शहर की ओर पलायन। हर एक पहाड़ी के मूल धर्म का अनुसरण करते हुए पवन भी गुड़गांव में कुछ समय के लिये नौकरी भी करता है। लेकिन इसकी कहानी का ये अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। पवन पहाड़ी ने शुरुआती दिनों में स्कूली कार्यक्रमो में एक्टिंग के शिकार हुए। पाँचवीं और छठी से पवन रामलीला के पाठ में एक्टिंग सीखनी शुरु कर दी जो दौराहाट के पालटैक्निक कालेज में एकरिंग की झूम के रुप में साथियों को देखने को मिली। पवन ने एक साल की नौकरी के बाद हल्द्वानी से वीडियो बनाकर यूटूयूब पर डालने शुरु किये। लोगों की शुरुआती प्रक्रिया पवन को बेहद निराश करने वाली मिली। लेकिन पवन ने हार नहीं मानी। पवन ऐसी बातों को बिल्कुल इग्नोर कर देते हैं। धीरे धीरे पवन ने अपने वीडियो से लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली और आज वो उत्तराखंड के उभरते हुए स्टैंडप कमेडियन बन गए हैं।   

कितना कमाते हैं पवन पहाड़ी?

पवन आज के दिन न केवल यूटूयूब पर उत्तराखंड का एक उभरता हुआ चेहरा है बल्कि अपना खर्चा तक यूटूयूब से निकालने लगा है। उनके हरेक वीडियो पर हज़ारों क्लिक्स आते हैं। मोनेटाइज़ेशन के साथ यूट्यूब हर क्लिक पर पैसा देता है। ये इनकम डॉलर्स में होती है। यही नहीं पवन की इनकम के सोर्स इससे कहीं ज्यादा पब्लिक इवेंट से हैं। पवन को कई आयोजनों में बतौर गेस्ट या फिर परफोर्मर के तौर पर बुलाया जाता है। जिसके लिए पवन की अपनी फीस तय है। यानी जब भी पवन किसी इवेंट में लाइव पर्फोर्म करने के लिए बुलाए जाते हैं तो उनको तयशुदा राशि प्रदान की जाती है। यानी पवन की इनकम उनकी बुकिंग्स पर तय होती है। एक साल में पवन को Stand-Up Comedian के तौर पर जितने आयोजनों में बुलाया जाता है पवन की आमदनी उतनी ही ज्यादा होती है और यूट्यूब से आने वाली इनकम अलग। यानी पवन ने इतनी कम उम्र में ही इतनी इनकम शुरू कर दी है जिससे वो खर्च भी करते हैं और अपनी सेविंग्स भी कर लेते हैं।


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