एक सोच ने बदल दिया बाज़ार, मंडुवे के आटे के बनने लगे मोमोज़, रोल्स और केक

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नई सोच किस कदर एक क्रांति को जन्म दे सकती है इसका उदाहरण हाल ही में देखने को मिला है। युवाओं में मोमोज़ का शौक बहुत तेजी से बढ़ा है। सिर्फ मोमोज़ ही नहीं चाइनीज़ खाना हर युवा की पहली पसंद बन चुका है। लोग ये भी जानते हैं कि मैदा किस कदर पेट को नुकसान पहुंचाती है लेकिन स्वाद के आगे किसकी चलती है। लिहाज़ा युवा सेहत से खिलवाड़ कर स्वाद का आनंद लेने से बाज़ नहीं आते।


लेकिन एक सोच ने सेहत और स्वाद दोनों का संगम बना दिया। जहां स्वाद भी मिलेगा और सेहत भी। जी हां, अब चाइनीज खाने में मैदे की जगह पहाड़ के मंडुवे ने ले ली है। मंडुवे के आटे से कोटद्वार में मोमोज़ और स्प्रिंग रोल जैसे तमाम फूज आइटम्स तैयार किए जा रहे हैं। ये प्रयोग इतना सफल रहा कि अब देहरादून से लेकर दूर दराज के टूरिस्ट इलाकों में मडुवे के मोमोज़, स्प्रिंग रोल मिलने लगे हैं। ये स्वाद में जितने दमदार हैं उतने ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।


सबसे पहले कोटद्वार के केम्स इंस्टीट्यूट में मंडुवे के आटे से मोमोज व दूसरे तरहे के फूड आइटम्स तैयार किए गए। इंस्टीट्यूट में होटल मैनेजमेंट कोर्स करने वाले युवाओं ने प्रयोग के तौर पर मंडुवे से नए-नए व्यंजन बनाए। जिसका रिस्पॉन्स बेहद ज़बरदस्त मिला। यही नहीं अब मंडुवे से सिर्फ चाइनीज़ आइटम ही नहीं, लड्डू, बिस्किट, केक जैसी रेसिपी भी मार्केट में धूम मचा रही हैं जिन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं। केम्स इंस्टीट्यूट में होटल मैनेजमेंट का कोर्स संचालित करने वाले अजेंद्र राणा ने पहाड़ी खाने पर बहुत काम किया। राणा साहब को पहाड़ी खाने के साथ नए प्रयोग करना बेहद भाता है। लिहाज़ा उन्होंने चाइनीज़ आइटम्स में मंडुवे को इस्तेमाल कर एक नई क्रांति ला दी। राणा जी के मुताबित चाइनीज फूड आइटम्स के ठेलों, रेस्टोरेंट्स में लोगों की भीड़ लगी रहती है, पर सच तो ये है कि मैदे से बने ये व्यंजन स्वाद के साथ-साथ केवल बीमारी देते हैं। लिहाजा उन्होंने इसके विकल्प तैयार करने की ठानी और मंडुवे के मोमो की सोच ने उनके प्रयोग को सफल बना डाला। इंस्टीट्यूट में छात्रों को मंडुवे के व्यंजन बनाना सिखाया जा रहा है।

मंडुवे के आटे से चाइनीज फूड तो तैयार हो ही रहा है, मंडुवे की नमकीन भुजिया जैसे प्रोडेक्ट्स भी मार्केट में आ चुके हैं। ये लोगों को पहाड़ी अनाज से दोबारा जोड़ेगा। पहाड़ी उत्पादों की खपत बढ़ेगी। मंडुवे से लजीज व्यंजन बनेंगे तो लोग इन्हें सीखेंगे, इन्हें बेचेंगे, जिससे रोजगार मिलेगा, पलायन रुकेगा। स्वास्थ्य के लिए भी ये बेहद अच्छा है। इस तरफ ध्यान दिया जाए तो मंडुवा और दूसरे पहाड़ी अनाजों को रोजगार का बेहतर जरिया बनाया जा सकता है। केम्स में पढ़ने वाले छात्र यही कर रहे हैं। उत्तराखंड में ये प्रयोग एक नई क्रांति लेकर आया है। इस प्रयोग ने उत्तराखंड में मंडुवे की खेती करने वाले किसानों की भी बल्ले बल्ले कर दी है।


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