अल्मोड़ा के ऋषि सनवाल,पर्यटन के लिए छोड़ा IIT और IIM से मिला लाखों का पैकेज

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अल्मोड़ा के ऋषि,पर्यटन के लिए छोड़ा IIT और IIM से मिला लाखों का पैकेज

अपनी भूमि के लिए कोई लाखों रुपयों को छोड़ दे तो कहानी उत्साहित करती है। ये कहानी है उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में जन्मे ऋषि सनवाल की… जिन्होंने पहाड़ से प्यार के लिए अपनी लाखों की नौकरी छोड़ दी। वह नौकरी छोड़ दी जिसके लिए बचपन से पढ़ाई कर रहे थे। यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आईआईटी और आईआईएम परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए कुछ अलग करना होता है। ऋषि सनवाल का बचपन कोटद्वार में बिता। वह पढ़ाई में अच्छे थे, उन्हें इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाना था। पहली ही बार में उन्होंने आईआईटी का पेपर क्रेक किया। यहां से पढ़ाई पूरी हुई तो ऋषि आईआईटी मुंबई से आईआईएम अहमदाबाद चले गए।

एमबीए पूरा करने के बाद साल 2001 में ऋषि की नौकरी एक एमएनसी कंपनी में लग गई। बतौर कंसलटेंट के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई थी। आसमान छूने की चाहत रखने वाले ऋषि ने करियर में शायद ही पीछे देखा होगा। एक दशक तक बजाज, हिन्दुस्तान लीवर जैसी विख्यात कंपनी में वह सीनियर पद पर रहे लेकिन उनका ध्यान उत्तराखंड में था। वह चाहते थे कि अपना काम शुरू करें और पहाड़ के लोगों को रोजगार दे..

ताकि पलायन की समस्या का तोड़ खोजा जाए। यह बिल्कुल भी आसान नहीं था। ऋषि का लाखों का पैकेज था। 2012 से उन्होंने अपने स्टार्टअप के प्रोजक्ट पर काम करना शुरू किया और फिर नौकरी छोड़कर रामनगर से रानीखेत के बीच अपना पर्यटन व्यवसाय शुरू किया। पर्यटकों को लुभाने व अन्य लोगों को इस क्षेत्र में काम करने हेतु प्रोत्सहित करने के लिए ऋषि ने रिसर्च करना कभी नहीं छोड़ा।

रामनगर से रानीखेत रोड के घाटी इलाके में उन्होंने प्रकृति की गाेद में अपना रिजार्ट बनाया। यह एकदम घर जैसा था। जहां सैलानियों को घर की तरह खाना और रहना दिया जाता है। इसके अलावा उनका परिचय उत्तराखंड की संस्कृति से भी कराया जाता है। ऋषि सनवाल बताते हैं कि मेरी कोशिश पर्यटक के प्रकृति के करीब ले जाने की थी। इसके लिए पर्यटकों के लिए नार्थ इंडियन खाने से लेकर पहाड़ के व्यंजन और घूमने के लिए ट्रेकिंग, फॉरेस्ट गाइड, वर्ड वाचिंग जैसी सुविधा दी।

लॉकडाउन ने उत्तराखंड के पर्यटन की पूरी तरह से कमर तोड़ दी लेकिन ऋषि इसे कैसे उठाया जा सकता है, इस पर काम कर रहे हैं। उत्तराखंड में पर्यटन का विकास कैसे हो और क्या संभावनाएं भविष्य में हो सकती हैं इसपर काम कर रहा हूं। लोग घर तो वापस लौटे हैं लेकिन कैसे वह अपने लिए पहाड़ों में रोजगार खोजे व कैसे उन्हें पर्यटन से जुड़े कामों में जोड़ा जाए इस पर वह कार्य कर रहे हैं। इसके लिए वह युवाओं को पर्यटन क्षेत्र से जोडऩे के साथ ही ट्रैकिंग, फॉरेस्ट गाइड और जड़ी-बूटी मार्केट, ऐपण कला, कुमाऊंनी व्यंजन व लोककलाओं में प्रशिक्षण देकर पारंगत बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े।


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