Rosemary की खेती देगी मुनाफे की बंपर फसल, जानिए खेती और बिज़नेस के टिप्स

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असल में रोज़मेरी एक जड़ी-बूटी है। रोज़मेरी को समझने से पहले जड़ी-बूटी क्या होती है, उसका समझना ज्यादा ज़रूरी है। पौधे का कोई भी हिस्सा जैसे फूल, पत्ती, तना, छाल, फल, बीज, स्टिग्मा जिसमें भरपूर औषधियां मौजूद हों व स्वास्थ्य के लिए हितकारी हो, जड़ी बूटी कहलाता है। जड़ी-बूटी अपनी सुंगध, स्वाद, औषधीय गुण या फिर दूसरी विशेषताओं के लिए मूल्यवान मानी जाती है। रोज़मेरी ऐसी ही एक जड़ीबूटी है जिसका रोम-रोम औषधियों से भरपूर है। इसे आम भाषा में गुलमेंहदी कहा जाता है। ये सिर्फ अद्भुत स्वाद और सुगंध से भरपूर नही नहीं होती है बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं।

Rosemary / गुलमेंहदी होती क्या है?

गुलमेंहदी को अंग्रेज़ी में रोज़मेरी कहा जाता है। इस बारहमासी जड़ीबूटी का वैज्ञानिक नाम Rosamarinus officinalis है, लेकिन दुनिया में इसे सामान्यत: रोज़मेरी या गुलमेंहदी के नाम से ही जाना जाता है।रोजमेरी रसोईघर में सबसे अधिक पाए जाने वाली जड़ी-बूटियों में से एक है।यह भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उगाए जाने वाला चिकित्सीय पौधा है। इसके पौधे 4—5 फुट तक होते हैं। इसके फूल नीले रंग के होते हैं । यह पुदीना परिवार लैमियेसी (Lameaceae) की प्रजाति का पौधा है। यह गर्म, कड़वा और अधिक कसैले स्वाद का होता है और सूप, सॉस, स्टॉज, रोस्ट्स और स्टफिंग आदि के लिए उपयोग किया जाता है। यह विशेष रूप से इटैलियन सांस्कृतिक व्यंजनों का एक अभिन्न अंग है।

Rosemary के मुख्य पोषक तत्व

इस पौधे में कई सक्रिय सामग्री होती है।इसके मुख्य पोषक तत्व हैं विटामिन A, B2, B6, और C, और इसमें आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, फ़ास्फ़रोस  और कैल्शियम जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसमें कई एंटी-ऑक्सीडेंट भी होते हैं।आप चाहें तो इसकी ताज़ी पत्तियों को इस्तेमाल कर सकते हैं या फ़िर सुखाई हुई पत्तियाँ भी उपयोग में ला सकते हैं।इसके फूलों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

Rosemary / गुलमेंहदी की खेती कैसे करें?

Rosemary की खेती जितनी आसान है उतना ही बंपर फायदा भी है। रोज़मेरी की खेती के लिए सबसे खास क्लाइमेट का होना बेहद ज़रूरी होता है। इसकी खेती मध्य हिमालय क्षेत्र जहॉं पर बर्फ पड़ने की सम्भावना न हो सबसे उपयुक्त मानी जाती है।भारत में इसकी खेती उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर जैसे ठंडे इलाकों में की जा रही है। उत्तराखंड में इसकी खेती का प्रचलन तेज़ी से बढ़ रहा है। उत्तराखंड के किसानों को इससे होने वाले फायदों के बारे में पता चल चुका है। क्योंकि गुणकारी होने के चलते इसकी बाज़ार में काफी डिमांड है जिसके चलते किसानों ने रोज़मेरी की खेती को अपनी आय का विकल्प बना लिया है।

रोज़मेरी का पौधा 2-3 फीट ऊँचा बहुवर्षीय शाकीय पौधा है।इसकी पत्तियॉं सुई के आकार की 3-4 से.मी.तक लम्बी होती है।पत्तियों में सुगन्धित तेल पाया जाता है जिसमें मुख्य रसायन साइनिआल होता है।इत्र उद्योग में इसका खूब प्रयोग होता है।इसके तेल का अच्छा निर्यात संभव है। जबकि सूखी पत्तियॉ का प्रयोग खाद्य पदार्थो या फिर पिज्जा वगैरह में खूब होता है।

  • रोज़मेरी की खेती के लिए जलवायु कैसी होनी चाहिए, ये सबसे अहम कड़ी है। इसके लिए जलवायु का शीतोष्ण होना ज़रूरी होता है यानी जहाँ वर्ष भर मौसम ठण्डा रहता है तथा पाला युक्त हो उपयुक्त है।
  • किस तरह की मिट्टी रोज़मेेरी की खेती के लिए उपयुक्त होती है तो ये भी जान लीजिए कि इसकी खेती के लिए मृदा हल्की कंकड़ युक्त उपयुक्त होती है
  • खेत की तैयारी एवं बुबाई प्रर्वधन के लिए ज़रूरी जानकारी का होना बेहद ज़रूरी है।रोज़मेरी की खेती के लिए बीज द्वारा प्रति हैक्टेयर 2 किलो बीज के अनुसार नर्सरी तैयार की जाती है। जिसके लिये 2 ग्राम बीज प्रति 1 वर्ग मी. भूमि में छिड़ककर रेत से ढक देते हैं। 14-15 ºC से. तापमान पर बीज का जमाव होता है। 8-10 सप्ताह में पौध रोपण हेतु तैयार हो जाते हैं। रोज़मेरी का उत्पादन/प्रवर्धन कटिंग द्वारा भी किया जा सकता है।
  • रोज़मेरी की खेत की तैयारी कैसी होनी चाहिए इसका भी खास ख्याल रखना होता है।भूमि की अच्छी प्रकार जुताई कर उसमें सन्तुलित खाद डालकर समतल कर लेना चाहिये। जिससे फसल की पैदावर उचित व अच्छी हो
  • रोज़मेरी की खेती के लिए बुवाई/रोपणविधि को समझना ज़रूरी है।नर्सरी में तैयार पौध के खेत में 45 x 45 सेमी. दूरी पर रोपित करना चाहिये। प्रति हैक्टेयर 30,000 पौध से अच्छी उपज प्राप्त होती है।इसका अगर आप खास ख्याल रखेंगे तो आपको इसकी खेती में दिक्कत ज़रा भी नहीं आएगी।
  • रोज़मेरी एक जड़ीबूटी है लिहाज़ा इसकी खेती में किसी भी तरह की रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए आपको ऑर्गेनिक/Organic खाद तैयार करके ही खेती करनी चाहिए।इसके लिए आपको 20 टन गोबर की खाद और 20  किलो  ग्राम माइक्रो भू पावर के अनुसार प्रति एकड़ में मिलाना होगा। इससे खेती के नतीजे काफी बेहतर आते हैं और आप बाज़ार में Organic Rosemary उपलब्ध करवा सकते हैं।
  • रोज़मेरी की खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन का उचित होना बेहद ज़रूरी है। रोज़मेरी की खेती के लिए बुआई के तुरन्त बाद 3-4 बार लगातार सिंचाई करनी होती है और बाद में समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिये।
  • रोज़मेरी की खेती की खास बात है कि इसमें रोग/कीड़े नहीं लगते हैं लेकिन जड़ को सड़न से बचाने के लिये बुआई से पहले बीज को जैव कवकनाशी नीम के तेल से उपचारित कर लेना चाहिये।
  • अब बारी आती है फसल कटाई की। लिहाज़ा पहले साल में बुआई के 4 माह बाद 50 प्रतिशत फूल आने पर कोमल भाग को काट कर हर्ब्स एकत्र कर ली जाती है। प्रथम वर्ष में दो बार तथा तीसरे वर्ष से साल में तीन से चार बार हर्ब्स प्राप्त की जाती है।
  • रोज़मेरी की उपज के बाद अगर इसका तेल निकालना हो तो उसका भी गणित समझ लीजिए। सूखी रोज़मेरी से 0.7-3 प्रतिशत 85-100 किलों प्रति हैक्टेयर, प्रतिवर्ष तेल मिलता है। Rosemary Oil की मार्केट में खूब डिमांड है। लिहाज़ा इसका अनुमानित मूल्य 2 हज़ार से तीन हज़ार रुपए प्रति किलोग्राम होता है। हालांकि इसका मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की मांग के आधार पर तय होता है।

Rosemary/ रोज़मेरी के फायदे

इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं यह बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकने, दर्द से छुटकारा दिलाने और सूजन कम करने में भी सहायक है।Rosemary रोग प्रतिरोधक क्षमता, याददाश्त, एकाग्रता, पाचन शक्ति, न्यूरोलॉजिकल सुरक्षा और कैंसर जैसे रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित करने के लिए योग्य पौधा माना जाता है।बहुत प्राचीन समय से गुलमेंहदी या रोज़मेरी (Rosmarinus officinalis) को कई देशों में हेल्थ और ब्यूटी ट्रीटमेंट में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह सुगंधित पौधा कई परिस्तिथियों में उपयोगी है। इसके फ़ायदों के चलते इसे एक ज़रूरी नेचुरल कॉस्मेटिक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। साथ-साथ यह घर की साफ़-सफ़ाई में भी बहुत काम में आता है। पुराने समय में रोज़मेरी का प्रतीकात्मक यानी सिंबॉलिक महत्व होता था। साफ़-सफाई के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली एक वस्तु के अलावा इसे सौभाग्य, सच्चाई और भरोसे का प्रतीक माना जाता था।

याददाश्त सुधार में बहुत काम आती है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Memory Improvement

वैसे तो Rosemary के चमत्कारिक प्रभाव हर किसी को पता हैं लेकिन याददाश्त में सुधार और बुद्धि व ध्यान बढ़ाने में रोज़मेरी का कोई जवाब नहीं। हालांकि इस विषय पर अभी कई शोध और अध्ययन किए जा रहे हैं। बुढ़ापे में जब व्यक्ति भूलने की बीमारी से ग्रसित होने लगता है तो रोज़मेरी नर्व्स को यानी संज्ञानात्मक गतिविधि को उत्तेजित करने में मदद करता है। Rosemary अल्जाइमर या डिमेंशिया (मनोभ्रंश) जैसी बीमारियों के लिए भी काफी हितकारी होता है।

तनाव कम करने में सहायक – Benefits of Rosemary in Stress Relief

रोजमेरी की खुश्बू ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इसकी सुगंध से आप अपने मूड में त्वरित रुप से सुधार कर स कते हैं यही नहीं मन को शांत रखने और चिंता या तनाव से राहत के लिए रोज़मेरी काफी उपयोगी माना जाता है। इसके तेल की चर्चा हम पहले ही कर चुके हैं। Aromatherapy भी Rosemary के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए Rosemary Oil की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में काफी डिमांड है।

प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Immunity Booster

रोजमेरी में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के गुण विद्यमान होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट, सूजन को कम करने वाले और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुणों की वजह से ही इसकी बाज़ार में काफी मांग रहती है। रोज़मेरी कई तरह की बीमारियों के खिलाफ आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है यानी एक तरह से Immunity Booster का काम करती है।

संक्रमण से भी बचाती है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary against Bacterial Infections

रोज़मेरी खासकर बैक्टीरिया संक्रमण के खिलाफ काफी पावरफुल माना जाता है। पेट की बीमारियां अकसर बैक्टीरियल इंफेक्शन से होती हैं लिहाज़ा रोज़मेरी पेट की बीमारियों का रामबाण माना जाता है। H. Pylori बैक्टीरिया एक आम और बहुत खतरनाक बीमारिया पैदा करने वाला बैक्टीरिया है जो पेट के अल्सर का कारण बन सकता है। इसी तरह, Rosemary स्टेफ संक्रमण (Staph infections) को रोकने में मदद करता है जिसकी वजह से हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है। 

पेट की समस्याओं के लिए रामबाण है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary for Stomach Problems

अगर आपका पेट ख़राब है, कब्ज, सूजन, दस्त आदि से परेशान हैं तो प्राकृतिक उपाय के तौर पर रोज़मेरी का इस्तेमाल आपको इन सबमें काफी राहत देगा। इसके सूजन को कम करने वाले और उत्तेजक गुण काफी हद तक कब्ज, सूजन, दस्त का इलाज कर सकते हैं। लिहाज़ा इसका सेवन आप किसी भी तरह ज़रूर कीजिए ताकि इन छोटी-मोटी लेकिन आम बीमारियों से आप निजात पा सकें। इससे आपके आँतों के कार्यों और आपके जठरांत्र (यानी पेट और आँत) संबंधी प्रणाली को नियमित करने में मदद मिल सकती है।

साँस की बदबू से राहत दिलाती है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Bad Breath

रोज़मेरी खासियत जान के आप हैरान रह जाएंगे। ये एक ब्रेथ फ्रेशनर या कहें कि माउथ फ्रेशनर के रूप में काम करता है। Rosemary Bad Breath के लिए अचूक दवाई मानी जाती है। इसीलिए तो लोग इसका कच्चे पत्तों को चबाकर इसका सेवन इसलिए भी करते हैं कि सांसों की बदबू से वो निजात पा सकें। रोज़मेरी एक प्राकृतिक जीवाणुरोधी एजेंट के रूप में काम करती है। इससे आपके मौखिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।हालांकि इसके इस्तेमाल का सही तरीका ये है कि गर्म पानी के एक गिलास में रोजमेरी की पत्तियां को उबाल लें और फिर बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए पानी से गरारे करें। इससे आपकी सांसों की बदबू गायब हो जाएगाी।

ब्लड सर्कुलेशन के लिए फायदेमंद रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Blood Circulation

रोजमेरी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवाह को बढ़ावा देने के काफी काम आती है। यह शरीर की महत्वपूर्ण अंग प्रणालियों और ब्ल्ड को आक्सिजनेट करने में मददगार होता है। यानी अच्छे और संतुलित रक्त प्रवाह के लिए रोज़मेरी काफी फायदेमंद माने जाने वाली जड़ी-बूटी है।

सिरदर्द में राहत देती है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Headache

आजकल की तनाव भरी ज़िन्दगी में हर 10 में से 3 व्यक्तियों की सरदर्द की समस्या आम बात बन गई है। रोजमेरी का इस्तेमाल सिरदर्द के लिए अचूक दवाई के तौर पर काम करता है। हालांकि इसके लोकप्रिय उपयोगों में से एक है माइग्रेन के उपचार के लिए इसका उपयोग करना। दर्द से प्रभावित जगह पर रोज़मेरी का लेप बहुत ही लाभकारी साबित होता है।

सूजन के उपचार में बेस्ट है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Inflammation

रोजमेरी में सूजन को कम करने वाले सारे गुण मौजूद होते हैं। कार्नोसोल और कार्नोसिक एसिड दो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और सूजन को कम करने वाले यौगिक होते हैं जो रोजमेरी में पाए जाते हैं। ये यौगिक मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं और जोड़ों की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। यह कई चीजों के लिए एक प्रभावी उपचार है, जिसमें हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) , गठिया और सर्जरी के दौरान चोट आदि शामिल है।

अवशिष्ट पदार्थों को बाहर करने में सहायक रोज़मेरी – Benefits of Rosemary in Detoxification

रोजमेरी डिटॉक्सिफिकेशन में सहायक मानी जाने वाली बूटी है। ये पेशाब के दौरान अधिक कुशलतापूर्वक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, जिस दर से शरीर पानी छोड़ता है, यह उसे बढ़ाकर नियमित करता है। फैट और कई और अवशिष्ट पदार्थों को बाहर धकेलने में मददगार साबित होती है रोज़मेरी

त्वचा के लिए शानदार है रोज़मेरी – Benefits of Rosemary for Skin Treatment/ Cosmetic Benefits

रोजमेरी में एंटी रिंकल्स गुण विद्यमान होते हैं यानी बुढ़ापे को रोकने वाले गुणों के लिए काफी अच्छी मानी जाती है रोज़मेरी। रोजमेरी के पत्ते त्वचा को प्रभावित करने की क्षमता रखते है। और त्वचा की युवा गुणवत्ता को सुधारने के लिए लाभकारी होते हैं, जबकि त्वचा में पुरानी कोशिकाओं को ठीक करने और प्राकृतिक चमक और त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए रोज़मेरी फायदेमंद होती है।

रोजमेरी के नुकसान – Side effects of Rosemary

अगर आपको पुदीने की प्रजाति के किसी भी पौधे से एलर्जी होती है, तो आपको इसके सेवन से बचना चाहिए।अगर आपको किसी तरह की एलर्जी है तो इसके इस्तेमाल से पहले आपको डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद ज़रूरी है।

रोज़मेरी काे इस्तेमाल के तरीके – How to use Rosemary

रोज़मेरी के कई फ़ायदे हैं। हमेशा रोज़मेरी अपने पास रखिए और इसके फ़ायदों का लाभ उठाईये! रोज़मेरी के इस्तेमाल के कई तरीके हैं इनमें से कुछ तरीकों को आप आसानी से अपनाकर फायदा उठा सकते हैं।

  • रोजमे़री को आप हर्ब्स की तरह इस्तेमाल कीजिए। मसलन आप इसे कच्चा या फिर छायादार जगह पर सुखाकर इस्तेमाल में ला सकते हैं। हरी पत्तियों को खाने में खुश्बू के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर खाने में सीधे पत्तियों को डालकर खाने के स्वाद को बढ़ा सकते हैं। चिकन-मटन की रेसिपी में इसी तरह रोज़मेरी की मुलायम पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। सूखी पत्तियों को सीज़निंग की तरह इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  • रोज़मेरी को चाय की तरह भी आप पी सकते हैं। इसके लिए आपको एक कप गर्म पानी में रोज़मेरी की 3 से 4 ग्राम पत्तियों को दो से तीन मिनट तक उबाल कर चाय बना सकते हैं।ये ना सिर्फ आपकी सांसों की बदबू को खत्म करेगी बल्कि पेट की समस्याओं से भी निदान दिलाएगी।
  • रोज़मेरी का तेल भी काफी काम आता है।लेकिन इसका प्रयोग कम ही करें या फिर सीमित मात्रा में ही करें तो बेहतर होगा।
  • अगर आपको पुदीने की प्रजाति के किसी भी पौधे से एलर्जी है तो रोज़मेरी का इस्तेमाल बिना डॉक्टर के परामर्श के ना करें।

घर में उगाइए रोज़मेरी – Grow Rosemary in your Kitchen garden

आजकल किचन गार्डेन लोगों का शौक बन चुका है। इससे ना सिर्फ लोगों को अपने खाने का स्वाद बढ़ाने की चीज़ें अपनी बालकोनी में ही मिल जाती हैं बल्कि हर्ब्स से कई बीमारियों का निवारण भी हो जाता है। रोज़मेरी भी लोगों के किचन गार्डन की शान बन चुका है। लोग अपने किचन गार्डन में रोज़मेरी तो अवश्य ही उगाते हैं। तो आप भी अपने Kitchen garden में Rosemary को आसानी से उगा सकते हैं इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना होगा।

  • रोज़मेरी को आसानी से एक गमले में उगाया जा सकता है। छोटी जगह में ही इसकी काफी पौध आसानी से उग सकती है। हालांकि इसके लिए जलवायु को थोड़ा ठंडा होना ज़रूरी होता है लेकिन आप फिर भी इसे आसानी से अपने किचिन गार्डन में उगा सकते हैं।
  • इसकी खास बात ये है कि इसे बारामासी पौधा कहा जाता है यानी एक बार लगाने के बाद आपको साल भर ताजी पौध आपको देता रहेगा। इसकी ताज़ी पत्तियों से आप अपने भोजन को स्वादिष्ट बना सकते हैं या फिर चाय और हर्ब्स की तरह भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • रोज़मेरी का पौधा कई साल तक अपनी पौध आपको देगा। मसलन एक बार लगा देने के बाद आप इससे 3-4 साल तक आराम से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • तो अपने किचन गार्डन को रोज़मेरी से ज़रूर सुसज्जित कीजिए क्योंकि इस गुणकारी पौधे से आपके और आपके परिवार का स्वास्थ्य लाभान्वित ज़रूर होगा।

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