फैशन डिज़ाइनिंग छोड़ Uttarakhand में शुरू किया Start-Up, बकरी पालन से धमाकेदार इनकम

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भेड़-बकरी पालन को आज भी दूसरे दर्जे का काम माना जाता है। लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है। लोगों ने इसे अपने जुनून से जोड़ा है। और एक बिज़नेस के तौर पर इससे कमाई करनी भी शुरू कर दी। यही वजह है कि बकरी पालन अब एक व्यवसाय का रूप ले चुका है। उत्तराखंड के रानीपोखरी की श्वेता तोमर (Shweta Tomar) ने भी इस काम को एक जुनून के तौर पर आज़माया और एक मिसाल कायम कर दी। फैशन डिजाइनिंग की ग्लैमरस जॉब छोड़ श्वेता ने बकरी पालन को अपना जीवन बना लिया। श्वेता को बकरियों और मुर्गियों से बेहद प्यार है लिहाज़ा उन्होंने अपने फॉर्म में बकरी पालन और मुर्गी पालन दोनों को अपना लिया। नई सोच का नज़ारा आपको इस फ़ॉर्म में घुसते ही नज़र आ जाएगा। क्योंकि यहां पर हर चीज व्यवस्थित और तकनीक से लैस है। कहने के लिए तो ये सिर्फ बकरी पालन केन्द्र है लेकिन असल में इसके पीछे श्वेता की मेहनत और जज्बा छुपा है जिसने उन्हें ऊचाइयों पर पहुंचा दिया।

फैशन डिजाइनर श्वेता तोमर और उनके इंजीनियर पति रॉबिन स्मिथ (Robin Smith) को नौकरी का बंधन कभी भी समझ नहीं आया। दोनों को कुछ नया और अलग करने की चाहत थी। इसलिये उन्होने देहरादून में शुरू  गोट फर्मिंग (बकरी पालन) (Goat Farming) की और अपने इस बिज़नेस यूनिट का नाम दिया प्रेम एग्रो फार्म (Prem Agro Farm)। आज इस बकरी पालन बिज़नेस की बदौलत वो दूसरों के लिये रोल मॉडल बन गये हैं और लोगों को बता रहे हैं कि कैसे मेहनत और लगन को अपना जुनून बना लेने से मंजिल को पाया जा सकता है।

रानीपोखरी न्याय पंचायत क्षेत्र के भोगपुर गांव की रहने वाली श्वेता तोमर ने एग्रो फार्मिंग की शुरूआत अपने पिता के नाम पर की। पिता स्व.प्रेम सिंह तोमर के नाम पर ही उन्होंने अपने फॉर्म हाउस का नाम रखा है।  साइंस ग्रेजुएशन के बाद श्वेता ने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और कुछ समय उन्होने नोएडा और दिल्ली में फैशन इंडस्ट्री में काम भी किया। लेकिन, श्वेता को हमेशा से पिता का सपना पूरा करने की चाहत थी, वो अपना एग्रो फार्म खोलना चाहते थे।

दिल को पक्का कर श्वेता ने नौकरी छोड़कर पिता के सपने को पूरा करना का एक मिशन बनाया और उन्हीं के नाम पर जनवरी, 2016 में प्रेम एग्रो फार्म की स्थापना कर डाली। श्वेता के पास आज फार्म में अलग-अलग नस्लों की सौ से भी ज्यादा बकरियां हैं। खास बात ये है कि श्वेता को जितना इन बकरियों से लगाव है तो बकरियां भी श्वेता को उतना ही प्रेम करती हैं। इन बकरियों में सिरोही, बरबरी, जमना पारी और तोता पारी ब्रीड (नस्ल)के पांच हजार से लेकर एक लाख तक के बकरियां मौजूद हैं। बकरियों के लिए बने विशेष तरह के प्लेटफार्म के नीचे मुर्गी पालन किया जाता है। इसके अलावा गोशाला अलग से बनाई गई है।

आज श्वेता ने इस काम में अलग मुकाम हासिल कर लिया है। वह बकरियों का दूध निकालने से लेकर उनकी देखभाल करने में जुटी रहती हैं। जरूरत पड़ने पर वह खुद ही बकरों को बिक्री के लिए लोडर में लादकर मंडी ले जाती हैं। दूध के अलावा बकरियों की बिक्री इंटरनेट के माध्यम से भी करती हैं। श्वेता बताती हैं शुरुआत में सरकारी स्तर पर छोटी-मोटी कई दिक्कतें आईं पर पशुपालन विभाग का उसे भरपूर सहयोग समय-समय पर मिलता रहा।

आप भी कर सकते हैं Goat Farming (गोट फार्मिंग) / बकरी पालन का बिज़नेस

तो श्वेता की कहानी रही लेकिन अगर आपको भी गोट फॉर्मिंग करनी है तो आपके लिए ये सही वक्त है। गोट फार्मिंग (बकरी पालन) की शुरूआत आप छोटे स्तर पर भी कर सकते हैं। शुरुआती दौर में इसमें 10 बकरियों पर एक बकरा रखा जाता है। सामान्य प्रजाति की बकरियां रखने पर इसमें करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की लागत आती है। बशर्ते जमीन अपनी हो। उन्नत नस्ल की बकरियां रखने पर लागत थोड़ा बढ़ जाती है।गोट फार्मिंग (बकरी पालन) में बकरियों को रखने का शेड विशेष तरीके से बनाया जाता है। इसमें जमीन से करीब 5 से 7 फीट ऊपर लकड़ी का प्लेटफार्म बनाया जाता है। इसके बेस में लगी लकड़ी की फट्टियों में कुछ इंच का गेप छोड़ दिया जाता है। ताकि बकरियों का मल-मूत्र सीधे जमीन में चले जाए। इससे बार-बार सफाई की जरूरत नहीं पड़ती।दूसरा बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। इसके अलावा बकरियों को दिया जाने वाला पौष्टिक आहार, चारा, और समय-समय पर लगने वाले टीकों से संबंधित जानकारी उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड (यूएलडीबी) द्वारा ट्रेनिंग के दौरान दी जाती है। श्वेता ने भी विभाग से ट्रेनिंग लेने के बाद अपना व्यवसाय शुरू किया।



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