दूसरे राज्यों को लग गया पहाड़ का स्वाद, पूरे उत्तराखंड में उदाहरण बन गया टिहरी का लड़का

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कोरोना वायरस के चलते सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाया। दूसरे राज्यों से लोगों को अपने घर पहुंचाया गया। इस दौरान कई लोगों की नौकरी भी छूट गई। रोजगार वापस मिलने का डर तो हमेशा ही रहता था, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें अपना भविष्य अपने तरीके से लिखना था। राज्य में कई ऐसी कहानियां हमारे सामने आ चुकी हैं, जिसमें प्रवासियों ने घर पहुंचने के बाद स्टार्टअप शुरू किया और अब वह अपने फैसले से खुश हैं। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने स्वरोजगार को अपनाया है और अब गांव में बैठकर शानदार आमदनी कर रहे हैं। स्वरोजगार के कुछ ऐसे उदाहरण हमारे सामने आए हैं जिन्होंने स्वरोजगार के पथ पर चल कर सफलता हासिल की है और अपने साथ और भी लोगों को रोजगार दिया है। टिहरी के चंबा निवासी शिशुपाल रावत ने भी इस लीग में ही शामिल हैं।

शिशुपाल रावत श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय से एमबीए टूरिज्म की पढ़ाई करने बाद नौकरी के लिए बाहर गए। पिछले 10 सालों से बाहर चीजों को समझ रहे हैं। उन्होंने देखा कि ऑनलाइन सेवा और पहाड़ी प्रोडक्ट शहरों में पहुंच रहे हैं। क्यों ना इसी क्षेत्र में कोई स्टार्टअप खोला जाए। उन्होंने पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र में लोबिया, गहत, राजमा, चौसा, पहाड़ी आलू, भट्ट, मंडवा, उड़द, सोयाबीन और भंगजीरा की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी। एक ही प्लेटफॉर्म पर यह मिले, इसके लिए उन्होंने ‘पहाड़ी टेस्ट’ नाम का ऑनलाइन पोर्टल बनाया है। पोर्टल ने ग्राहकों को शिशुपाल से जोड़ा और उनके घरों पर डिलीवरी आसानी से पहुंच रही है। खास बात ये है कि इस स्टार्टअप से उन्होंने 15 अन्य लोगों को जोड़कर रोजगार दिया है।

बता दें कि शिशुपाल ने अपने साथ स्वरोजगार में 15 और युवकों को भी रोजगार दिया है। पहाड़ी उत्पादों की बिक्री से वह महीने के लाखों कमा रहे हैं। पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र से शुरू करके अब उनके काम को चमोली जिले में भी विस्तार दिया जा रहा है। इसके अलावा ऋषिकेश में इन उत्पादों के लिए एक गोदाम भी तैयार करवा रहे हैं।

शुरुआत के बारे में शिशुपाल रावत ने कहते हैं कि तकरीबन 4 लाख रुपए से उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया था। उनकी टीम में 15 लोग हैं। सभी अलग-अलग राज्य से हैं। इनके होने से डिलीवरी में सपोर्ट मिलता है। वह प्रतिमाह लगभग 2 लाख तक की आमदनी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पहाड़ी वस्तुओं/ उत्पादों को पहचान देनी हैं तो क्षेत्र में इस तरह के अन्य स्टार्टअप्स का खुलना जरूरी है लेकिन इसके लिए रिसर्च और धैर्य जरूरी है। शिशुपाल ने कम वक्त में अच्छे संपर्क बना लिए हैं और इसलिए वह हफ्ते में 200 किलो तक पहाड़ी उत्पाद बेच रहे हैं। पहाड़ी उत्पादों की बड़े शहरों में बेहद भारी डिमांड है और वहां केवल ऑनलाइन तरीके से ही पहुंचा जा सकता है, इसलिए उन्होंने वेबपोर्टल भी शुरू किया है।


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