शुगर का रामबाण इलाज है स्टीविया, Uttarakhand में ऐसे खेती कर कमाएं लाखों

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आजकल शुगर यानी मधुमेह की बीमारी आम हो गई है। सेहत से जुड़ी समस्याओं में शुगर की शिकायत लोगों में ज्यादा है। आज लोगों को शुगर की बीमारी ने जकड़ रखा है। शुगर को जड़ से खत्म करने के लिए कई तरह की दवाईयां बाज़ार मे हैं, यही नहीं कई डॉक्टर्स और साइंसटिस्ट इसको जड़ से खत्म करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं। स्टीविया को शुगर का रामबाण इलाज माना जाता है। इसे पाउडर फॉर्म में बाजार में बेचा जाता है। शुगर के पेशेंट के लिए स्टीविया की पत्तियों को अचूक उपाय तौर पर देखा जाता है। यह चबाने पर हल्की मीठी और कसैला सा स्वाद देती है। आपको बता दें कि सरकार भी स्टीविया की खेती के लिए किसानों को प्रेरित कर रही है क्योंकि इसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारी डिमांड है। सदियों से दक्षिणी अमेरिकी देशों में स्टीविया पौधे की पत्तियों का उपयोग प्राकृतिक स्वीटनर के तौर पर होता है। खास बात है कि अब स्टीविया पूरे विश्व में पाया जाता है, जो कि प्रकृति प्रदत्त मीठा के विकल्प के तौर पर मशहूर है।

शुगर का रामबाण इलाज है स्टीविया

कृषि विश्वविद्यालयों वा इस पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टीविया शुगर रोगियों के लिए रामबाण है। इसके इस्तेमाल से शुगर का लेवल कंट्रोल में रहता है। इसे पाउडर के तौर पर तैयार किया जाता है जिसकी केवल आधा ग्राम मात्रा का उपयोग ही ब्लड में शुगर की मात्रा को बढऩे से रोक सकता है। खास बात है कि यह चीनी से लगभग 20 गुना ज्यादा मिठास देता है। इसके साथ ही यह कई अन्य बीमारियों को जड़ से मिटाने में सक्षम माना गया है।

2022 तक स्टीविया का बाजार 1000 करोड़ रुपए!

मधुमेह पीड़ितों के लिए बेकरी उत्पाद, सॉफ्ट ड्रिंक और मिठाइयों में भी मधुपत्र की सूखी हुई पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। मधुमेह के शिकार लोगों के लिए ये भले ही अच्छी खबर ना हो लेकिन किसानों के लिए यह आय बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका हो सकता है। 2022 तक स्टीविया के बाजार में लगभग 1000 करोड़ रुपए की और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसे देखते हुए नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (एनएमपीबी) ने किसानों को स्टीविया की खेती पर 20 फीसदी सब्सिडी देने की घोषणा की है। कैल्शियम व फास्फोरस से भरपूर होने के साथ इन पत्तियों में कई तरह के खनिज भी होते हैं। इसलिए इनका उपयोग मधुमेह रोगियों के लिए किया जाता है। चीन के बाद भारत में सबसे मधुमेह के मरीज है। चीन में मधुमेह से पीड़ितों की संख्या 11 करोड़ तो वहीं भारत में ये संख्या 7 करोड़ के आसपास है। सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है मधुमेह। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टीविया की कीमत 5.5-6.5 लाख प्रति 100 किलो है।

उत्तराखंड में ऐसे करें स्टीविया की खेती

उत्तराखंड में स्टीविया की खेती आपको लाखों का मुनाफा करवा सकती है। स्टीविया को उगाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत की भी दरकार नहीं है। इस फसल की सबसे खास बात ये है कि इसकी पौध में कोई कीड़ा या रोग नहीं लगता। किसान एक एकड़ में पांच से छह लाख रुपए की कमाई आराम से कर सकते हैं। स्टीविया का रोपन कलमों से किया जाता है जिसके लिए 15 सेंटीमीटर लम्बी कलमों को काटकर पोलिथिन की थैलियों में तैयार कर लिया जाता है। टिस्यू कल्चर से भी पौधों को बनाया जाता है जो सामान्यत: 5-6 रुपए प्रति पौधे मिलते हैं। इसके पौधे से जो पाउडर तैयार किया जाता है वो चीनी के मुकाबले 300 गुना ज्यादा मीठी है।

इसकी खेती में एक और फायदा ये है कि इसमे सिर्फ देसी खाद से ही काम चल जाता है। सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसकी बुवाई सिर्फ एक बार की जाती है और सिर्फ जून और दिसंबर महीने को छोड़कर दसों महीनों में इसकी बुवाई होती है। एक बार फसल की बुवाई के बाद पांच साल तक इससे फसल हासिल कर सकते हैं। साल में हर तीन महीने पर इससे फसल प्राप्त कर सकते हैं। एक साल में कम से कम चार बार कटाई की जा सकती है। स्टीविया का रोपन मेड़ों पर किया जाता है जिसके लिए लगभग 9 इंच ऊंचे बेड्स पर पौधे पंक्ति से पंक्ति 40 सेंटीमीटर तथा पौधों से पौधे 15 सें.मी. की दूरी पर लगाते हैं। लगाने का उपयुक्त समय फरवरी-मार्च है। लिहाजा इन पद्धितियों को अपना कर आप स्टीविया की खेती से लाखों कमा सकते हैं।


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