स्मार्ट सिटी के कॉन्सेप्ट पर भारी पड़ा उत्तराखंड के इस गांव का मॉडल, कई सम्मान किए हासिल

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उत्तराखंड में कुछ तो बात है, पलायन की मार झेलने के बाद भी ये राज्य अपनी पहचान तेजी से बना रहा है। कोई भी क्षेत्र को शिक्षा, खेल और विज्ञान, पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चे अपना हुनर दुनिया को दिखना जानते हैं। ऐसे ही है कुछ उन लोगों के साथ जो बाहर नौकरी तो करते हैं लेकिन उनका दिल अपने गांव में बसा रहता है। इस तरह की कई स्टोरी हम लोगों ने आपके सामने पेश की है जो पहाड़ में अपना काम कर रहे हैं। ना सिर्फ कमा रहे हैं बल्कि गांव के लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। लेकिन आज हम आपकों एक अलग तरह की कहानी बताएंगे। इस बार चर्चा किसी शख्स या शख्सियत की नहीं बल्कि पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक छोटे से गांव की है जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।

पिथौरागढ़ जिले के कुसौली ग्राम पंचायत की चर्चा हर कोई कर रहा है। इस गांव ने पिछले वर्ष स्वच्छता के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। इससे पहले भी कुसौली ग्राम पंचायत अन्य अनेक पुरस्कार प्राप्त कर उत्तराखंड में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। एक तरफ शहर के लोग हैं जो ग्रामीण इलाकों में सैलानी के रूप में जाते हैं तो गंदगी फैलाते हैं और दूसरी तरफ ये गांव जो अपनी सफाई के चलते नाम कमा रहा है।

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कहते हैं ना जब कोई अच्छा करता है तो कप्तान को श्रेय जाता है ऐसा ही कुसौली ग्राम पंचायत के साथ हो रहा है। ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह ने स्वच्छता को लेकर ग्रामीणों को ऐसी राह दिखाई कि वो एक मिसाल बन गई। उन्होंने ग्रामीणों में स्वच्छता के खिलाफ लड़ाई की हिम्मत भर दी और फिर क्या पूरा गावं, सड़कें, दीवारें स्वच्छता की कहानी खुद-ब-खुद बोलने लगीं। ग्राम प्रधान की सोच एक मिशन बनई जिसको गांव वालों का भरपूर साथ मिला। यही वजह रही कि ये कुसौली गांव दूसरे गांवों के लिए एक उदाहरण बन गया।

कुसौली गांव पिथौरागढ़ जिले के विण विकासखंड में आता है। यह गांव चर्चा में इस लिए हैं क्योंकि जहां के 223 परिवारों के गांव की सफाई को अपना कर्तव्य समझते हैं। प्रत्येक परिवार के पास कूड़ा निस्तारण के लिए जहां अलग-अलग कूड़ादान मौजूद है । इसके अलावा गांव में 8 स्थानों पर सार्वजनिक कूड़ेदान भी रखें ग‌ए है। नालियों के गंदगी वातावरण को दूषित ना करें उसके लिए पाटल लगाए गए हैं। गांव के रास्ते एवं सड़कों स्थिति किसी स्मार्ट कस्बे से कम नहीं हैं। इस गांव में आपकों कोई व्यक्ति खुले में कूड़ा फेंकते नहीं दिखेगा। इसके अलावा जैविक खाद के लिए गांव में 80 गड्डे एवं 25 सोकपिट भी लगाए गए हैं।

गांव को माहौल को थोड़ा लिविंग बनाए रखने के लिए विभिन्न सरकारी भवनों जैसे- स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र एवं पंचायत भवन आदि की दीवारों को सुंदर पेंटिंग की गई है। ग्रामीणों के कार्यों ने कुसौली ग्राम पंचायत क‌ई महत्वपूर्ण पुरस्कार दिलाए हैं। इस गांव को साल 2012 में मिला निर्मल ग्राम पुरस्कार। इसके अलावा वर्ष 2015 में कुसौली ग्राम पंचायत खुलें में शौच से मुक्त भी घोषित हो चुका है। साल 2018 में मिलें राज्य स्वच्छता गौरव पुरस्कार, उत्कृष्ट ग्राम पंचायत पुरस्कार शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले दीनदयाल उपाध्याय पंचायत संस्कृतिकरण पुरस्कार भी साल 2018 में इस गांव की झोली में गया है। ग्राम प्रधान रघुबीर सिंह ने इस विकास का पूरा श्रेय अपनी जनता को दिया है। उनका कहना है कि ग्रामीणों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। लिहाज़ा शुरुआत में तो हर किसी ने कहा कि हम ये करने की कोशिश करेंगे लेकिन बाद में ये मिशन हर गांववालों की रगों में बहने लगा।और पूरे गांव ने उत्तराखंड राज्य में अपनी अलग पहचान बना ली। जिस तरह से इस गांव ने अपनी सफाई की चमक से देश में नाम रौशन किया है अगर उत्तराखंड के दूसरे गांव भी इसी मॉडल को अपना लेंगे तो विकास की ऐसी इबारत लिखने के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। ये कहानी वाकई प्रेरणादायक हैं जिसके पात्र गांव का हर वो व्यक्ति है जिसने साफ-सफाई को लेकर प्रण कर रखा है। ग्राम प्रधान और गांव के हर व्यक्ति को हमारा सलाम!


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