लॉकडाउन में MNC की नौकरी गंवाई,अल्मोड़ा आकर रणजीत सिंह ने किया दशरथ मांझी जैसा काम

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लॉकडाउन में MNC की नौकरी गंवाई,अल्मोड़ा आकर रणजीत सिंह ने किया दशरथ मांझी जैसा काम

पहाड़ सी समस्याओं का सामना दशरथ मांझी के हौसले के साथ ही किया जा सकता है। बिहार के दशरथ मांझी को पूरा भारत माउंटेन मैन के नाम से जानता है तो बस उनके जज्बे और मेहनत की वजह से। माउंटेन मैन ने 22 साल तक छैनी और हथोड़े कि मदद से पहाड़ का सीना चीर कर दिखाया था। इसी तरह की मिसाल सामने आई है उत्तराखंड, अल्मोड़ा के धामस गांव से। दरअसल इस गांव के रणजीत सिंह को यहां के लोग दशरथ मांझी कह कर बुलाते हैं।

दूसरे पहाड़ी इलाकों की तरह ये गांव भी पलायन से प्रभावित गांव है। हवालबाग विकासखंड में स्थित धामस गांव के दशरथ मांझी यानी रणजीत सिंह की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। कोरोना काल में अपनी नौकरी गंवाने वाले रणजीत ने यहां पहाड़ तोड़ कर सीढ़ीनुमा खेत तैयार किए हैं। रणजीत सिंह भी अन्य लोगों की तरह शहर में काम करते थे। दिल्ली की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे रणजीत को कोरोना में लगे लॉकडाउन ने खासा नुकसान पहुंचाया और उन्हें आना पड़ा वापिस अपने गांव।

यहां आकर जब उन्होंने खेती करने का मन बनाया तो उनके सामने पहाड़ समान चुनौती थी। दरअसल पहाड़ में खेती करना इतना आसान नहीं था। जंगली जानवरों का खतरा और पानी की कमी जैसी अपार समस्याएं रणजीत के सामने भी आईं। रणजीत के पास जमीन तो थी लेकिन वो भी खेती के लिए पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपने रिश्तेदारों से बातचीत कर उनकी बंजर पड़ी करीब 50 नाली जमीन को लीज पर ले लिया। ये जमीन नहीं थी, पहाड़ था और यहां खेती करना लगभग नामुमकिन सा दिखता था, लेकिन रणजीत सिंह ने तय कर लिया था कि उनको कुछ तो ज़रूर करना है।

रणजीत ने खेती करने की ट्रेनिंग भी ली और ट्रेनिंग लेने के बाद पहाड़ काटने की मुहिम में जुट गए। कोई भी महान काम करते वक्त लोग आपकी मज़ाक बनाते ही हैं, यह बहुत समय से चलता आया है। लोगों ने रणजीत का मज़ाक बनाया, लेकिन ये रणजीत के मजबूत मनोबल का ही किया धरा था कि लोग बाद में उनसे प्रेरणा ले कर उनकी मदद करने लगे। इसी तरह सभी के साथ और रणजीत की खुद की मेहनत के बाद पहाड़ तोड़ कर सीढ़ीनुमा खेत तैयार किए गए।

रणजीत अब इन खेतों में मटर, फूलगोभी, बंद गोभी और अन्य सब्जियों की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही महंगे उत्पाद जैसे केसर, मशरूम और सेब की खेती भी रणजीत इन खेतों में किया करेंगे। रणजीत सिंह दूसरे दशरथ मांझी कहलाने के साथ साथ खेती में भी अपना जौहर दिखा रहे हैं। अपनी खेती के माध्यम से, वे अपनी और अपने गांव की तस्वीर बदलने में जुटे हैं। उन्हें देखकर गांव के दूसरे युवा भी काश्तकारी की राह पर चल पड़े हैं।


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