गोपाल की मेहनत रंग लगाई, उत्तराखंड की धरती में उगे धनिए ने बनाया रिकॉर्ड

गोपाल उप्रेती ने 6 फीट 1 इंच लम्बा धनिया की पौध उगाकर बड़े-बड़े खेती विशेषज्ञों को चौंका दिया है। गोपाल के इस कारनामे को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया है।

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गोपाल की मेहनत रंग लगाई, उत्तराखंड की धरती में उगे धनिए ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

धनिया को देखकर कभी आपने महसूस नहीं किया होगा कि इसकी पौध 6 फीट से भी लंबी हो सकती है। ऐसा अमूमन होता नहीं है लेकिन उत्तराखंड के एक किसान ने ये कारानामा कर दिखाया है। जी हां, ये कहानी एक ऐसे सफल किसान की है, जिसको दिल्ली की नौकरी ज्यादा रास नहीं आई और वहां से नौकरी को अलविदा कहकर पहाड़ों पर अपने शौक पर काम करना शुरु किया यानी खेती के पैशन को उन्होंने अपना करियर बना लिया। लेकिन अब इसी किसान ने खेती में मेहनत कर एक नई मिसाल कायम की है। ये कहानी अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में रहने वाले गोपाल उप्रेती की है, जिन्होंने खेती में कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। हालांकि वो आमतौर पर जैविक सेब की बागवानी करते हैं। गोपाल उप्रेती ने 6 फीट 1 इंच लम्बा धनिया की पौध उगाकर बड़े-बड़े खेती विशेषज्ञों को चौंका दिया है। गोपाल के इस कारनामे को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया है।

कभी देखा है 6 फीट 1 इंच धनिया का पौधा!

गोपाल उप्रेती के फार्म में उगी धनिया की पौध 6 फीट 1 इंच लंबी है जिसने दुनिया भर के किसानों को हैरान कर दिया है। खेती विशेषज्ञों की मानें तो किसान धनिया की अच्‍छी से अच्छी किस्‍म की बुवाई करता है, तो उसे लगभग 4 फीट तक लंबी धनिया की पौध मिलती है। मगर गोपाल उप्रेती के फार्म में उगी धनिया की पौध 6 फीट 1 इंच लंबी है। जिसके पीछे उन्होंने काफी मेहनत भी की। सवाल उठता है कि धनिए की इतनी बड़ी पौध आखिर कारगर कैसे हुई, इसका जवाब बेहद आसान है। धनिए की इतनी लंबी पौध सिर्फ और सिर्फ ऑर्गेनिक तकनीक द्वारा ही संभव है। गौरतलब है कि अब तक धनिया की 5 फुट 11 इंच की लंबाई रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन गोपाल उप्रेती के चमत्कार ने सारी निगाहें उनकी तरफ मोड़ दी हैं।

सालाना 1 करोड़ का मुनाफ़ा!

वैसे गोपाल उप्रेती आमतौर पर सेब की बागवानी किया करते हैं। अपने ऑर्गेनिक ऐपल फार्म में बागवानी को लेकर गोपाल हमेशा नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। यकीन मानिए इस प्रगतिशील किसान को सेब के बगीचे से सालाना 1 करोड़ रुपए से ज्य़ादा का मुनाफ़ा मिल जाता है। ये रकम ऐसी है जिसको सुनने के बाद हर कोई गोपाल उप्रेती जैसा किसान बनना चाहेगा लेकिन इसके लिए एक बड़ी सोच का होने ज़रूरी होगा।

खेती से ही बदलेंगे किसान के हालात

गोपाल जैसे किसान की नज़र में किसानी करने का नज़रिया बिल्कुल जुदा है वो हर किसान पर पड़ने वाली नज़र को बदलना चाहते हैं। सोच के उस चक्रव्यूह को भेदना चाहते हैं जहां किसान एक दबा-कुचला सा, पीड़ित, वंचित सा दिखता है।

गोपाल उप्रेती कहते हैं खेती को हम अब भी गरीबी, पिछड़ेपन और समस्याओं से जुड़ा हुआ देखते हैं। यदि किसान भी बड़ी गाड़ियों में चलता हुआ दिखे, किसान के बच्चे फर्राटा अंग्रेजी बोलते हुए दुनिया की सैर करते दिखाए जाएं, खेती को हम उद्योग की तर्ज पर विकसित करें और खेती को न्यू नॉर्मल दिखाने में सफल हो जाएं तो स्थिति बदल सकती है। बदली स्थिति में किसान भी अपने खेत में उगी सब्जियों-फल को अमेज़न पर सीधा ग्राहक को बेचता हुआ दिखेगा।

2016 में की जैविक खेती की शुरुआत

दिल्ली की नौकरी छोड़ने के बाद गोपाल उप्रेती ने साल 2016 से सेब की बागवानी करना शुरू किया। वह अपने गांव में ही हाई डेंसिटी सेब की बागवानी कर रहे हैं। इसके साथ ही एवोकेडो, आडू और खुबानी की जैविक खेती करते हैं। इतना ही नहीं, वह जैविक लहसुन, मटर, गोभी और मेथी भी उगाते हैं। इस प्रगतिशील किसान की सोच ने उन्होंने आज शानदार किसान का दर्जा दिला दिया है। धनिए की इस किस्म को पैदाकर ना सिर्फ उन्होंने रिकॉर्ड बनाया बल्कि किसानों के प्रति लोगों की छोटी सोच रखने वालों को भी एक बड़ी सीख दी है कि वो दिन दूर नहीं जब खेती से ही किसानों की किस्मत बदल जाएगी।


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