उत्तराखंड में बना सेनेटरी पैड्स का हर्बल बायोडिग्रेडेबल वर्ज़न, गंदगी और प्रदूषण से भी मिलेगी निजात

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सैनेटरी पैड के विषय में हमारे देश में अभी भी लोग खुलकर बात नहीं करते हैं। वे सभी जानते हैं कि ये वस्तु काफी महत्वपूर्ण हैं और हर घर में इसका इस्तेमाल होता है। सैनेटरी पैड पांचवे नंबर की ऐसी वस्तु है जो गंदगी के लिए जिम्मेदार है। यह सिंगल यूस कॉफी के ग्लास और स्ट्रॉ से ज्यादा गंदगी फैलाती है। इसका दावा European Commission द्वारा प्रकाशित होने वाले पेपर ने किया है जो समुद्र पर मिलने वाले प्लास्टिक से होने वाली जानलेवा बीमारी पर काम कर रहा है। अमेरिका के एक नेशनल रिसर्च सेंटर की मानें तो महिलाएं औसतन अपने पूरे जीवन काल में 160 किलोग्राम menstrual waste निकालती हैं वो भी बिना प्रिकॉशन जहां ना कोई दवा का सैनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं होता है। इसके अलावा सैनेटरी पैड भी बढ़ी मात्रा में यहां वहां मिलता है जो गंदगी फैलाता है।

इसी दिशा में हल्द्वानी के आरआई नोनोटेक स्टार्टअप ने काम किया है। बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड बनाना शुरू किया है, जो महिलाओं और वातावारण दोनों के लिए सुरक्षित है। RI Nanotech के सीईओ राजेंद्र जोशी ने बताया कि पूरे विश्व मे आज भी सैनिटरी पैड को इस्तेमाल करने के बाद अधिकतर ऐसी महिलाएं हैं, जो खुले में पैड फेंक देती हैं। जिसकी वजह से पर्यावरण दूषित होता है।आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल 1,13,000 सैनिटरी पैड कचरे में तब्दील होकर पर्यावरण पर बोझ बन जाते है। जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती तो इन्हीं सैनेटरी पैड के बोझ को कम करने की है। इसे देखते हुए हर्बल सैनेटरी पैड फ्लोरिश का आविष्कार किया है। हर्बल सैनेटरी पैड फ्लोरिश 3 महीने से 5 महीने के अंदर फर्टिलाइजर में तब्दील हो जाता है। जबकि पॉलीमर से बने हुए सैनेटरी पैड सालों तक पड़े रहते हैं।

इस हर्बल सैनटरी पैड की कीमत भी बाजार में उपलब्ध पॉलीमर से बने हुए सैनटरी पैड के बराबर ही होगी। इसके अलावा हर्बल इको फ्रेंडली सैनेटरी पैड को महिलाएं प्रयोग में लाती हैं तो इससे स्किन से जुड़ी बीमारियों का खतरा एकदम कम होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि इसे बनाने में बैंबू फैब्रिक यानी बॉस, केला, नीम, बैंबू कॉटन और ग्राफीन नैनो मैटेरियल का प्रयोग किया जाता है। इन चीजों का प्रयोग करने से यह सैनेटरी पैड एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल होगा। अधिकतर मामलों में पॉलीमर से बने हुए सैनेटरी पैड स्किन पर रैशेज पैदा कर देते हैं। जिससे स्किन से जुड़ी बीमारियों के पैदा होने का खतरा रहता है। दूसरी तरफ हर्बल सैनेटरी पैड इस्तेमाल करने का फायदा यह भी है कि अगर आप इसे प्रयोग में लाने के बाद खुले में फेंक भी देते हैं तो यह जैसे-जैसे डिस्पोज होगा उस दिशा में यह पर्यावरण को दूषित नहीं कर पाएगा।

राजेंद्र जोशी ने बताया सैनेटरी पैड में ग्राफीन ऑक्साइड के होने से उसकी होल्ड की क्षमता बढ़ जाती है तो पुराने पेड में नहीं होती है। इसकी कीमत 50 रुपए होगी जिसमें 10 पेड होंगे। यह मार्केट में जल्द आएगा और टेस्ट के लिए इसके 40 से ज्यादा महिलाओं ने इसे इस्मेताल किया है, जिसमें हमें सकारात्मक नतीजे मिले।


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