26 साल के छोरे ने बदल दी नई टिहरी के इस गांव की तस्वीर, विदेशों से पहुंच रहे हैं लोग

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देहरादून: रोजगार केवल बाहरी वस्तु पर निर्भर नहीं करता है। वो निर्भर करता है नई सोच पर … जो समाज को भी उस राह पर बढ़ने के लिए प्रेरित करें। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसने ईश्वर की देन को अपनी आय का साधन बना दिया। नई टिहरी में देवलसारी गांव बंगसिल निवासी 26 साल के अरुण प्रसाद गौड़ को पूरा राज्य उनके काम के लिए जान रहा है। वो पर्यावरण एवं विकास संस्थान मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन से पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। अरुण की मानें तो क्षेत्र में मधुमक्खी पालन को लेकर उन्हें स्वरोजगार के मौके दिखे और इसलिए उन्होंने काम शुरू किया। यह अब बेहतर माध्यम बनता जा रहा है। युवा भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और अपनी रोजी कमा रहे हैं।

गांव का काम मार्केट पहुंचा

युवाओं के काम को बाजार तक पहुंचाने के लिए देवलसारी पर्यावरण संरक्षण एवं तकनीकी समिति ने ‘देवदार हनी’ नाम से लोगो तैयार किया है। इस नाम से ही अब शहद बेची जा रही है। अरुण जंगलों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं। वह इस क्षेत्र में काम भी कर रहे हैं। अरुण को ‘सेंक्चुरी एशिया मैगजीन’ की ओर से अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हाथों ‘बेस्ट वाइल्ड लाइफ सर्विस अवार्ड 2019’ प्रदान किया गया है, अपने अवार्ड के 50 हजार रुपये भी अपने इलाके के जंगलों की हिफाजत में लगा दिए। हनी तैयार करने हेतु अरुण युवाओं को प्रशिक्षित भी करते हैं।

बच्चों के अध्यापक बने अरुण

क्षेत्र बन गया है पर्यटक स्थल

अरुण का जीवन जंगल, मधुमक्खी, तितलियों के बीच ही रहता है। कमाई के अलावा वह जंगलों को खूबसूरत बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं। उन्होंने देवलसारी में तितलियों गढ़ बना दिया है। यहां के तितली शोध केंद्र पर करीब दो सौ प्रजाति की तितलियों और डेढ़ सौ पक्षी प्रजातियां के दीदार होते हैं। अरुण की मुहिम के बदौलत देवलसारी पर्यावरण एवं विकास संस्थान की ओर से तीन दिवसीय तितली महोत्सव का भी हर साल आयोजन होता है, जहां देश के विभिन्न क्षेत्रों से पर्यटक, प्रकृति प्रेमी और शोधार्थी छात्र बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

जंगल को बचाना है

देवलसारी क्षेत्र के करीब दस गांव के सैकड़ों लोग मधुमक्खी पालन कर रुपए कमा रहे हैं। यहां पर शहद उत्पादन को बढ़ाने के समिति ग्रामीणों को बकायदा प्रशिक्षण भी दे रही है। अरुण संस्थान के निदेशक व मुख्य कर्ताधर्ता हैं। ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन के लिए बी बॉक्स भी दिए गए हैं। वर्तमान की बात करें तो क्षेत्र के विभिन्न गांवों से करीब चार-पांच सौ किलो शहद का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा अरुण प्रसाद गौड़ वन विभाग की मदद से लोगों के बीच मधुमक्खी जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं। वह अपने क्षेत्र का जंगल बचाने के लिए इको टूरिज्म पर नेचर गाइड ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। यहाँ के जंगलों में तरह-तरह के वन्यजीव पाए जाते हैं। उनकी सुरक्षा अरुण कर्तव्य मानते हैं। बतादें कि पढ़ाई-लिखाई के दौरान अरुण साइंस से ग्रेजुएट बनना चाहते थे लेकिन उन्होंने उसे छोड़ जंगल, मधुमक्खी पालन, तितली संरक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके सालों के प्रयासों से विकसित यहां का तितली पार्क इको टूरिज्म को भारत ही नहीं पूरे विश्व में पहचान मिल रही है, यहां देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचने लगे हैं।

गोद लिया स्कूल

अरुण के लिए यहां तक पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं था। लोगों द्वारा उनका मजाक बनाया जाता था और देवलसारी के जंगल बचाने के लिए उनको माफिया की धमकियां भी मिलती थी। उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और अपने काम में जुटे रहे हैं। तभी अरुण आज पूरे क्षेत्र का विख्यात चेहरा बन गए हैं जिसकी बदौलत कई घरों के चूल्हे जलते हैं। इसके अलावा वह समाजिक कार्यों से भी जुड़े रहते हैं। अरुण ने मरम्मत के लिए बंगसिल का राजकीय इंटर कॉलेज भी गोद ले लिया है।


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