183 रुपये से 25 लाख सालाना तक का सफर, जानिए Uttarakhand के योगेश बंधानी की Success Story

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ये वक्त पहाड़ों से दूर जाने का नहीं, पहाड़ पर रहकर कुछ खास करने का है। जिस वजह से उत्तराखंड का युवा शहरों का रुख कर रहे थे वो सब तो अब अपने गांव, अपनी मिट्टी पर उपलब्ध है। अब बस उसे हासिल करने की ज़िद आनी चाहिए। उत्तराखंड के गांव से एक ऐसी ही सफलता की इबारत लिखी है एक युवा ने जिसने नौकरी छोड़कर नींबू के पौधों से अपना रोजगार शुरू किया और आज 25 लाख रुपये तक कमा रहा है।

ये कहानी है उत्तरकाशी नौगांव, कोटियाल गांव के रहने वाले हैं योगेश बंधानी की। 2013 में योगेश नौकरी छोड़ दी और गांव लौट गए। 10 महीने तक उन्होंने अपनी सोच को ज़मीनी हकीकत में बदलने के लिए संघर्ष किया और फिर शुरू हुआ उनकी किस्मत को बदलने वाला स्वरोज़गार। योगेश ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट पर काम करना शुरू किया। इस काम की शुरूआत उन्होंने महज 10 लीटर लेमन स्क्वैश बनाकर की। शुरुआती कठिनाइयों को योगेश पार करते चले गए और अपनी हिम्मत हमेशा बांधकर रखी। यही वजह रही कि कम संसाधनों के बावजूद वो अपने मिशन में कामयाब हो गए।योगेश ने अपने किचन गार्डन में लगे नींबू से ही अपने काम का श्रीगणेश किया। और अपने कारोबार को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया।

महज़ 183 रुपए से कमाए 500 रुपए

योगेश की किस्मत का ताला खुला महज़ा 183 रुपये से। उन्हें पहली बार अपने काम पर सिर्फ 183 रूपए ही खर्च करने पड़े और फिर इससे कमाई हुई 500 रुपये की। ये हौसला तोड़ने वाली कमाई नहीं बल्कि अपने पैरों पर खड़े हो अपने स्वरोज़गार को और बड़ा करने की हिम्मत थी। लिहाज़ा उन्होंने स्वरोजगार से तैयार उत्पाद को सबसे पहले अपने ही घर वालों को ही बेचा। इसके बाद अपने एक दोस्त से एक लाख रुपये लेकर मई 2014 में 120 वर्ग फीट की किराए की दुकान ली और किराए के बर्तनों में अपना काम शुरू किया। परिवार को भी तब तक योगेश की सोच पर भरोसा हो गया था और घरवालों ने भी साथ देना शुरू किया।

लोन नहीं मिला तो बाइक गिरवी रखकर किया बिज़नेस

2015 में योगेश ने जिला उद्योग केंद्र उत्तरकाशी सेप्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन के लिए एप्लाई किया। लेकिन बैंकों ने बिना किसी आधार के लोन देने से मना कर दिया।लेकिन इससे उनका हौसला टूटा नहीं बल्कि उनका जुनून और हिलोरे मारने लगा।योगेश को कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल गिरवी रखकर कर्ज ले लिया।वर्षों तक संघर्ष की आग में तपकर आखिरकार योगेश की मेहनत का रंग दिखने लगा। कोटियाल गांव में योगेश ने 2000 वर्ग फीट में युवा हिमालय एग्रो फूड्स प्रोडक्ट्स नाम से अपना प्रोजेक्ट लगाकर कारोबार शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि युवा हिमालय एग्रो फूड प्रोडक्ट्स नाम बहुत सोच विचार कर रखा गया है जिसमें युवा हिमालय यहां की युवा पीढ़ी और हिमालय पर्वत श्रृंखला दोनों की छुपी हुई क्षमता और ऊर्जा को दर्शाता है।

जैम, चटनी, अचार, जूस समेत 20 से ज्यादा उत्पादों का कारोबार

इस समय उत्तराखंज में युवा हिमालय एग्रो फूड प्रोडक्ट्स अपने ब्रांड नाम को खूब चमका रहा है। उनकी प्रोडेक्ट रेंज में अलग-अलग प्रकार के स्क्वैश, चटनी, जैम, अचार, जूस के लगभग 20 से ज्यादा उत्पाद तैयार किए जाते हैं जिनकी बाज़ार में काफी डिमांड है। पारंपरिक तरीके से तैयार होने के कारण इसका स्वाद बेहतरीन होता है और रसायन का डर भी नहीं रहता है। योगेश ने अपने कारोबार में गांव की 20 महिलाओं को रोजगार दिया है जो स्क्वैश जैम सहित दूसरे प्रोडक्ट्स बनाने में माहिर हैं। यही नहीं योगेश की कंपनी क्षेत्र के 200 से अधिक किसानों से कच्चा माल खरीदते हैं। उनका लक्ष्य 2022 तक 500 लोगों को रोजगार देना है। योगेश अब युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उत्तराखंड का युवा भी जो कि शहर जाने की फिराक में है वो ठान ले तो पहाड़ में ही वो सब कुछ कर सकता है। 183 रुपये से 25 लाख सालाना की योगेश की इस सफलता की कहानी को हमारा सलाम।


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